उज्जैन, अग्निपथ। बुधवार को निरंजनी अखाड़े में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्री महंत रविंद्रपुरी महाराज ने विभिन्न धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर अपने बेबाक विचार व्यक्त किए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि साधु-संत बनना पैसा कमाने का जरिया नहीं है और आगामी सिंहस्थ मेले में फर्जी साधुओं के लिए कोई जगह नहीं होगी।
आधार कार्ड से होगी संतों की जांच
महंत रविंद्रपुरी ने कहा कि सनातन धर्म और ब्राह्मणों को बदनाम करने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने साध्वी मंदाकिनी जैसे मामलों की ओर इशारा करते हुए कहा कि ऐसे कई फर्जी संत हैं जो लोगों को ठगने का कार्य कर रहे हैं। सिंहस्थ मेले की मर्यादा बनाए रखने के लिए इस बार कड़े कदम उठाए जाएंगे।
मेले में आने वाले प्रत्येक संत का आधार कार्ड और उनकी संस्था के पहचान पत्र की सघन जांच की जाएगी। जो भी फर्जी पाया जाएगा, उसे मेले से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। उन्होंने जोर दिया कि हमारा मुख्य उद्देश्य हिंदुओं को जगाना है, न कि धर्म के नाम पर व्यापार करना।
पांचवें शंकराचार्य पर दिया बड़ा बयान
हरिद्वार में पांचवें शंकराचार्य बनाए जाने के विवाद पर उन्होंने खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित परंपरा के अनुसार शंकराचार्य केवल चार ही होते हैं, जो अपनी-अपनी पीठों पर विराजमान हैं। पांचवां शंकराचार्य बनाने की बात पूरी तरह गलत है। जिसे पांचवां शंकराचार्य कहा जा रहा है, उन्हें केवल एक मानद उपाधि से विभूषित किया गया है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह बिना पीएचडी किए भी किसी को मानद ‘डॉक्टरेट’ की उपाधि दी जाती है, यह मामला भी वैसा ही है। अतः इस पर व्यर्थ विवाद नहीं होना चाहिए।
गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग
गौ सेवा के मुद्दे पर चर्चा करते हुए महाराज ने कहा कि हर संत गौमाता के उत्थान के लिए प्रयास कर रहा है। उन्होंने मांग की कि गौमाता को अविलंब ‘राष्ट्रमाता’ घोषित किया जाना चाहिए। इस विषय पर उनकी दिल्ली में भी चर्चा हुई है और वे आगे भी सरकार से इस बारे में संवाद जारी रखेंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र की सरकार इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाएगी क्योंकि गौमाता के हित में कार्य करना सभी का अधिकार और कर्तव्य है।
