उज्जैन, अग्निपथ। धर्मनगरी उज्जैन में वर्ष 2028 में आयोजित होने वाले सिंहस्थ महापर्व की भव्यता और दिव्यता को देखते हुए पश्चिम रेलवे रत्नलाम मंडल ने अपनी कमर कस ली है। श्रद्धालुओं की भारी संख्या, सुगम यातायात और सुरक्षित रेल परिचालन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से रेलवे बुनियादी ढांचे के विकास कार्यों को युद्ध स्तर पर गति दी जा रही है। इसी कड़ी में रेलवे के आला अधिकारियों ने धरातल पर उतरकर तैयारियों का जायजा लिया।
महाप्रबंधक ने किया निर्माण कार्यों का स्थलीय निरीक्षण
पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक (प्रभारी) प्रदीप कुमार ने 18 मार्च को उज्जैन क्षेत्र का दौरा कर सिंहस्थ-2028 से संबंधित प्रस्तावित और प्रगतिरत विकास कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने मंडल के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ लंबी चर्चा की और स्पष्ट किया कि इन कार्यों में किसी भी प्रकार की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निरीक्षण के दौरान उन्होंने पवासा, मोहनपुरा, विक्रम नगर, चिंतामण गणेश, क्षिप्रा ब्रिज और नई खेड़ी स्टेशन पर चल रहे निर्माण कार्यों को बारीकी से देखा।
निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूर्ण करने के सख्त निर्देश
महाप्रबंधक श्री कुमार ने संबंधित अधिकारियों और कार्य एजेंसियों को दो टूक निर्देश दिए कि सभी प्रोजेक्ट्स को निर्धारित समय-सीमा के भीतर ही पूर्ण किया जाए। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ एक वैश्विक आयोजन है, जिसमें करोड़ों श्रद्धालुओं का आगमन होता है, ऐसे में रेलवे की बुनियादी संरचना का मजबूत होना अनिवार्य है। इस दौरान उन्होंने क्षेत्रीय रेल उपभोक्ता सलाहकार समिति और मंडल रेल उपभोक्ता सलाहकार समिति के सदस्यों से भी मुलाकात की और उनके सुझावों पर चर्चा की।
राज्य प्रशासन के साथ समन्वय पर जोर
मीडिया से चर्चा के दौरान महाप्रबंधक ने बताया कि सिंहस्थ से जुड़े कार्यों को रेलवे प्रशासन प्राथमिकता के आधार पर ले रहा है। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए राज्य प्रशासन के साथ निरंतर समन्वय स्थापित किया जा रहा है। कार्यों की प्रगति की निगरानी के लिए नियमित अंतराल पर बैठकें आयोजित की जा रही हैं ताकि किसी भी तकनीकी या प्रशासनिक बाधा को तुरंत दूर किया जा सके।
इस महत्वपूर्ण निरीक्षण दौरे के दौरान रतलाम मंडल रेल प्रबंधक अश्वनी कुमार सहित मंडल के तमाम वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। रेलवे का लक्ष्य है कि सिंहस्थ 2028 तक उज्जैन के आसपास के सभी उप-स्टेशनों को इस तरह विकसित कर दिया जाए कि मुख्य स्टेशन पर दबाव कम हो और यात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिल सकें।
