सुसनेर, अग्निपथ। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने शनिवार को ग्राम आमला के समीप तीर्थ नर्सरी में संचालित एक अवैध एमडी ड्रग्स फैक्ट्री पर बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 31 किलो 250 ग्राम नशीला पदार्थ जप्त किया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में जप्त ड्रग्स की कीमत 10 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। हालांकि, स्थानीय पुलिस और मीडिया को भनक लगे बिना घंटों चली यह कार्रवाई अब संदेह के घेरे में है।
दबिश के दौरान मुख्य आरोपियों का फरार होना संदिग्ध
क्राइम सूत्रों के अनुसार, जिस समय ब्यूरो की टीम नर्सरी के बाहर मौजूद थी, उस दौरान फैक्ट्री के भीतर मुख्य आरोपी का एक परिजन मौजूद था। चर्चा है कि नर्सरी के प्रवेश द्वार पर लगे सीसीटीवी कैमरों के जरिए टीम की आहट पाकर आरोपी पिछले दरवाजे से तालाब के रास्ते फरार हो गया। इस मामले में एक अन्य व्यक्ति के भी मौके से भागने की सूचना है। ब्यूरो के अधिकारियों का तर्क है कि वे किसी बड़े तस्कर के आने का इंतजार कर रहे थे, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या टीम को यह आभास नहीं था कि सीसीटीवी के माध्यम से उनकी निगरानी की जा रही है?
6 घंटे का रहस्यमयी इंतजार और गोपनीयता
नारकोटिक्स ब्यूरो की कार्यप्रणाली पर सबसे बड़ा सवाल समय को लेकर उठ रहा है। जानकारी मिली है कि टीम तड़के 4:30 बजे नर्सरी के बाहर पहुँच गई थी, लेकिन वास्तविक कार्रवाई सुबह 10:00 बजे शुरू की गई। इस 5:30 घंटे के लंबे अंतराल ने आरोपियों को सबूत नष्ट करने या फरार होने का पर्याप्त समय दे दिया। इसके अलावा, कार्रवाई को स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन से पूरी तरह गोपनीय रखना भी ब्यूरो की मंशा पर सवाल खड़े करता है।
इन अनुत्तरित सवालों के घेरे में ब्यूरो की टीम
इस हाई-प्रोफाइल ड्रग्स कांड ने कई तीखे सवाल पैदा कर दिए हैं जिनका जवाब मिलना बाकी है:
सीसीटीवी फुटेज का क्या हुआ? नर्सरी में लगे सीसीटीवी कैमरों की डीवीआर जप्त की गई है या नहीं, और क्या रेड के समय के फुटेज सुरक्षित हैं?
मौके से किसे छोड़ा गया? रेड के दौरान फैक्ट्री में कितने लोग मौजूद थे और क्या किसी रसूखदार को मौके से जाने दिया गया?
नर्सरी मालिक पर कार्रवाई क्यों नहीं? ड्रग्स फैक्ट्री जिस नर्सरी में चल रही थी, उसके मालिक को अब तक आरोपी बनाकर संपत्ति सील क्यों नहीं की गई?
इंदौर कनेक्शन की हकीकत: सूत्रों का दावा है कि इंदौर से पकड़े गए दो तस्करों की निशानदेही पर यह कार्रवाई हुई, तो फिर मुख्य सरगना तक ब्यूरो के हाथ क्यों नहीं पहुँचे?
नारकोटिक्स ब्यूरो की यह कार्रवाई करोड़ों की ड्रग्स पकड़ने के लिहाज से सफल तो कही जा सकती है, लेकिन मुख्य आरोपियों का बच निकलना और प्रक्रियागत खामियां विभाग की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा रही हैं।
