सुसनेर,अग्निपथ। निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूचियों के शुद्धिकरण के लिए चलाए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान की पोल खुलती नजर आ रही है। सुसनेर विधानसभा में बीएलओ की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि घर-घर जाकर सर्वे करने के बजाय दफ्तरों में बैठकर ही सूचियों का मिलान कर दिया गया। इसका खुलासा तब हुआ जब आयोग ने मतदाता सूची का नया ड्राफ्ट प्रकाशित किया, जिसमें सुधार के बजाय कई तकनीकी और व्यावहारिक खामियां सामने आई हैं।
पुनरीक्षण के बाद का गणित: 10 हजार से अधिक नाम हटाए गए
एसआईआर अभियान से पहले सुसनेर विधानसभा में कुल 2,39,065 मतदाता दर्ज थे। गहन सर्वेक्षण के दावों के बीच कुल 10,243 मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। इसके अतिरिक्त, जानकारी उपलब्ध न कराने वाले 1138 मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं, जिनकी सुनवाई वर्तमान में एसडीएम और तहसीलदार स्तर पर की जा रही है।
हटाए गए नामों का वर्गीकरण:
मृत मतदाता: 3422
स्थानांतरित: 5661
दोहरी प्रविष्टि: 583
अनुपस्थित: 572
धरातल पर सच: मृत जीवित हैं और पुरुषों की जगह महिलाओं के फोटो
अभियान की हकीकत यह है कि सुसनेर के वार्ड क्रमांक 7, 8 और 9 की सूचियों में भारी विसंगतियां मिली हैं। उदाहरण के तौर पर, मतदाता क्रमांक 344 पर दर्ज व्यक्ति की मृत्यु अगस्त 2025 में हो चुकी है, लेकिन ड्राफ्ट में उनका नाम अब भी शामिल है। वहीं, क्रमांक 670 पर एक पुरुष मतदाता के नाम के आगे महिला का फोटो लगा है।
सूची की प्रमुख त्रुटियां:
विवाहित महिलाएं, जो अन्य जिलों में निवासरत हैं, उनके नाम नहीं हटाए गए।
बीएलओ को सूचना देने के बाद भी एक ही परिवार के सदस्यों के नाम अलग-अलग वार्डों में दर्ज हैं।
नए फोटो लेने के बावजूद पुरानी सूची के धुंधले फोटो ही रिपीट कर दिए गए।
सीरियल नंबर बदलने से परिवार के सदस्यों के नाम सूची के अलग-अलग पन्नों पर बिखर गए हैं।
प्रचार बैनर भी कर रहे गुमराह
प्रशासनिक लापरवाही का आलम यह है कि जनजागरूकता के लिए लगाए गए बैनर-बोर्ड पुरानी तारीखों का ही प्रचार कर रहे हैं। आयोग द्वारा अभियान की तारीखों में दो बार बदलाव किया गया, लेकिन सार्वजनिक स्थानों पर लगे बोर्ड अपडेट नहीं किए गए, जिससे आमजन दावे-आपत्ति की सही समय सीमा को लेकर भ्रमित हो रहे हैं। यदि समय रहते इन त्रुटियों पर आपत्ति दर्ज नहीं की गई, तो भविष्य में इन नामों को हटाना मुश्किल होगा।
