स्वास्थ्य सेवाओं में ढिलाई पर बरपा कलेक्टर का कहर, लापरवाहों का कटेगा वेतन

खरगोन, अग्निपथ। जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में उस वक्त हड़कंप मच गया जब कलेक्टर सुश्री भव्या मित्तल ने जिले की लचर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर कड़ा प्रहार किया। 2 अप्रैल 2026 को आयोजित इस समीक्षा बैठक में कलेक्टर ने स्पष्ट कर दिया कि जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए विभाग में कोई जगह नहीं है। योजनाओं के क्रियान्वयन में बरती जा रही कछुआ चाल पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने सख्त चेतावनी दी कि अब केवल कागजी घोड़ों से काम नहीं चलेगा, बल्कि धरातल पर परिणाम दिखाने होंगे।

लापरवाही की पराकाष्ठा: वेतन कटौती के आदेश

बैठक में मातृत्व स्वास्थ्य कार्यक्रम की समीक्षा के दौरान यह कड़वा सच सामने आया कि गर्भवती महिलाओं के पंजीयन और जांच जैसे संवेदनशील कार्यों में घोर लापरवाही बरती जा रही है। एनीमिया प्रबंधन की स्थिति मात्र 58 प्रतिशत होने पर कलेक्टर ने तीखे तेवर दिखाते हुए इसे तत्काल 80 प्रतिशत तक ले जाने का अल्टीमेटम दिया। सबसे बड़ी गाज उन कर्मचारियों पर गिरी जिन्होंने यू-विन पोर्टल पर प्रविष्टि और आवश्यक जांचों में कोताही बरती थी। कलेक्टर ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को दो टूक निर्देश दिए कि ऐसे लापरवाह कर्मचारियों का 15 दिनों का वेतन तत्काल प्रभाव से काट लिया जाए। उन्होंने साफ किया कि जो काम नहीं करेगा, उसे वेतन पाने का कोई हक नहीं है।

टीकाकरण में पिछड़ापन बर्दाश्त नहीं

एचपीवी और संपूर्ण टीकाकरण अभियान की विकासखंडवार समीक्षा में भी कलेक्टर का रौद्र रूप देखने को मिला। बड़वाह और भीकनगांव को छोड़कर शेष विकासखंडों की प्रगति अत्यंत शर्मनाक पाई गई। कलेक्टर ने अधिकारियों को फटकार लगाते हुए प्रतिदिन कम से कम 100 टीके लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने अनुविभागीय अधिकारियों को भी निर्देश दिए कि वे अपने क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की नियमित समीक्षा करें और सुनिश्चित करें कि कोई भी विभागीय अधिकारी अनुपस्थित न रहे। यू-विन पोर्टल पर डेटा प्रविष्टि में विफल रहने वाले खंड विस्तार प्रशिक्षकों को अंतिम चेतावनी पत्र जारी करने के निर्देश दिए गए हैं।

निष्क्रिय केंद्रों पर सख्त रवैया

कलेक्टर ने जिले के 69 प्रसव केंद्रों की स्थिति खंगालते हुए पाया कि कई केंद्र अब भी अक्रियाशील हैं। उन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुए आदेश दिया कि कोई भी प्रसव केंद्र बंद या निष्क्रिय नहीं रहना चाहिए। टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत चल रहे स्क्रीनिंग कैंपों की समीक्षा करते हुए उन्होंने झिरन्या और भगवानपुरा में दी गई एक्स-रे मशीनों के बेहतर उपयोग और शत-प्रतिशत स्क्रीनिंग सुनिश्चित करने को कहा। कलेक्टर की इस कड़क कार्यशैली ने साफ संदेश दे दिया है कि जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता से समझौता करने वालों पर प्रशासन का हंटर चलता रहेगा।

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