पिछले एक महीने से कोरोना गायब हो गया था। मध्यप्रदेश में उपचुनाव चल रहे थे। चुनाव के दौरान जगह-जगह भीड़ भरी सभाएं हुई। जुलूस और ढोल-ढमाकों के साथ रैली और जनसंपर्क हुए। इस दौरान चेहरों से मास्क लगभग गायब थे और भीड़ जुटाने वालों के खिलाफ कार्रवाई का दौर भी थम चुका था, क्योंकि नीति-नियम बनाने वाले नेता-जनप्रतिनिधि कार्रवाई के दायरे में आ रहे थे। इस दौरान कोरोना संक्रमितों की संख्या भी रोज ५-७ ही आ रही थी। अब चुनाव खत्म हो गए हैं और चुनाव खत्म होते ही चमत्कारिक रूप से कोरोना भी लौट आया है। कोरोना के लौटते ही नए संक्रमितों की संख्या भी बढक़र तीन-चार गुना हो गई। अब अफसर जिम्मेदारी निभाने के लिए मीटिंग में जुट गए हैं। बुधवार को जिम्मेदारों ने एक बार फिर तय किया कि मास्क नहीं लगाने वालों को १० घंटे तक जेल में डालो और जुर्माना भी लगाओ। जो भी कोरोना संक्रमण फैलाने का जिम्मेदार पाया जाए उस पर सख्त कार्रवाई करो। जिम्मेदारों का मानना है कोरोना अब फिर लौट आया है। इसे फैलाने वाले नेता सरकार चलाने में जुट गए हैं। सिर्फ जनता सडक़ पर मौजूद है, इस पर सख्ती का डंडा घुमाएंगे, तभी कोरोना पर अंकुश लगेगा।
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