जेलर और महिला जेल वार्ड प्रभारी पर प्रताडऩा के गंभीर आरोप

bhairavgarh jail ujjain

जमानत पर रिहा हुई महिला ने की गोपनीय शिकायत

उज्जैन, अग्निपथ। भैरवगढ़ जेल से जमानत पर रिहा हुई महिला ने सोमवार को जेलर और महिला जेल वार्ड प्रभारी की मुख्यमंत्री, गृहमंत्री से लेकर संभागायुक्त तक गोपनीय शिकायत कर विभागीय जांच की मांग रखी है। दोनों पर प्रताडऩा के आरोप लगाए गये हैं।

शिकायत में महिला ने बताया है कि हमारे ऊपर दर्ज अपराध के चलते माननीय न्यायालय ने ज्यूडिशियल कस्टडी में रखने आदेश जारी किया था। हम आदतन अपराधी नहीं हैं। किंतु हमारे साथ जेल परिसर में अत्याचार किया गया है। जेल में निरुद्ध बंदियों के साथ भी अत्याचार हो रहा है।

केन्द्रीय जेल में पदस्थ जेलर संतोष कुमार लडिय़ा और जेल वार्ड प्रभारी सुनीता चौहान अपने पद का दुरुपयोग कर रहे हैं। दोनों बंदियों को मानसिक, शारीरिक प्रताडऩा देकर आत्महत्या के लिये बाध्य कर देते हैं। इनके द्वारा बंदियों को पैसों के लिये इतना बाध्य किया जाता है कि उनका मानसिक संतुलन बिगड़ जाता है। हमसे भी पैसा मांगा गया। इंकार करने पर आधी रात को मारपीट कर शारीरिक प्रताडऩा दी गई। जिसका प्रमाण वहां लगे कैमरो के फुटेज में देखा जा सकता है।

गोपनीय शिकायत में जेलर पर जातिगत भेदभाव का आरोप भी लगाया गया है। महिला जेल वार्ड प्रभारी से घनिष्ठ संबंधों का उल्लेख भी किया गया है। सोमवार को शिकायत संभागायुक्त को की गई है। वहीं मुख्यमंत्री, गृहमंत्री, डीजी जेल भोपाल के साथ जेल अधीक्षक भैरवगढ़ को भी भेजी गई है।

बंदियों को उपलब्ध कराया जाता नशा

गोपनीय शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जेलर और जेल वार्ड प्रभारी जेल परिसर में आर्थिक रूप से संपन्न बंदियों को नशा उपलब्ध कराते हैं। बीड़ी-सिगरेट, शराब, गांजा सभी मोटी रकम देकर दिया जाता है। बीड़ी का बंडल एक हजार में, सिगरेट का पैकेट 25 सौ में मिलता है।

शराब के पांच हजार मांगे जाते हंै। तालाबंदी के दौरान शासन के आदेश पर पैरोल का लाभ दिया जाना था, जिसमें जेलर की रिपोर्ट पर ही कैदियों के चाल-चलन और व्यवहार का प्रमाण पत्र दिया गया। इसके एवज में भी 10 से 25 हजार तक की रिश्वत ली गई है। गोपनीय शिकायत में कई गंभीर आरोप लिखे गये हैं।

संभागायुक्त से नहीं हुआ संपर्क

गोपनीय शिकायत पर संभागायुक्त के मोबाइल पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका कॉल रिसिव नहीं हुआ।

नहीं मिली शिकायत

शिकायत को लेकर जेल अधीक्षक अल्का सोनकर से चर्चा की गई, उनका कहना था कि उनके पास तक कोई गोपनीय शिकायत नहीं पहुंची है। डाक दस्तावेजों में भी नहीं मिली है।

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