गायत्री नगर सेक्टर-ए में हुए फर्जीवाड़े पर अग्निपथ की पहल रंग लाई
उज्जैन, अग्निपथ। कानीपुरा रोड की अवैध कॉलोनी गायत्री नगर सेक्टर- ए में मकान खरीदने वालों के साथ हुई धोखाधड़ी के मामले में चिमनगंज मंडी थाने में एफआईआर दर्ज कर ली गई है।
कॉलोनी में मकान खरीदने वाले एक व्यक्ति की शिकायत पर पुलिस ने मकान बेचने वाले बिल्डर के खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं में अपराध दर्ज किया है। गायत्री नगर में फर्जी नक्शों के आधार पर मकान बन जाने की खबर सबसे पहले दैनिक अग्निपथ ने ही प्रमुखता से प्रकाशित की थी। अग्निपथ द्वारा किए गए खुलासे के बाद ही नगर निगम के अधिकारी जागे और इस मामले में पुलिस को कार्रवाई के लिए पत्र लिखा गया था।
गायत्री नगर सेक्टर-ए भारत गृह निर्माण संस्था की कॉलोनी है। कॉलोनी को नगर निगम ने अवैध माना है क्योंकि गृह निर्माण संस्था ने यहां किसी तरह के विकास कार्य नहीं कराए है।
कॉलोनी में संस्था के सदस्यों को प्लॉट तो बेच दिए गए लेकिन यहां बिजली, पानी, सडक़, बागीचा जैसी मूलभूत सुविधाएं ही नहीं जुटाई। कॉलोनी में प्लॉट लेने वाले ज्यादातर संस्था सदस्यों से यहां के प्लॉट अब बिल्डिरों ने औने-पौने दाम पर खरीद लिए है और अब वे यहां मकान बनाकर उंचे दाम पर लोगों को बेच रहे हैं। कॉलोनी अवैध है इसलिए फर्जी भवन अनुज्ञा के आधार पर यहां कई लोगों को मकान बनाकर बेच दिए गए।
इसी कॉलोनी में 14 लाख 25 हजार रुपए में कुछ महीनों पहले ही मकान खरीदने वाले सौरभ सोलंकी पिता रमेशचंद्र सोलंकी सहित 5 लोगों को नगर निगम ने नोटिस जारी कर उनसे बिल्डिंग परमिशन सत्यापित कराने को कहा था। नगर निगम अधिकारियों द्वारा कराए गए सर्वे में कॉलोनी में 5 लोग ऐसे मिले है जिनके मकानों की परमिशन संदेहास्पद थी। इन पांचो की परमिशन नगर निगम के पोर्टल पर कहीं इंद्राज होना नहीं पाई गई। मतलब साफ है कि पांचो की परमिशन जाली थी।
पुलिस की जांच से खुलासा हुआ कि पांचो लोगों को मकान बेचते वक्त बिल्डर प्रेम विश्वकर्मा निवासी दुर्गा कालोनी ने बिल्डिंग परमिशन की कॉपी उपलब्ध कराई थी। नगर निगम के कार्यपालन यंत्री रामबाबू शर्मा द्वारा भी इसकी पुष्टि कर चिमनगंज मंडी थाना प्रभारी को एफआईआर दर्ज करने के लिए पत्र लिखा गया था।
बुधवार की रात चिमनगंज मंडी पुलिस ने सौरभ सोलंकी की शिकायत पर बिल्डर प्रेम विश्वकर्मा के खिलाफ धारा 420 के तहत अपराध दर्ज कर लिया है।
अब बैंक वालों की भी जांच
अवैध कालोनी गायत्री नगर सेक्टर-ए में फर्जी भवन अनुज्ञा के आधार पर कई सारे लोगों को बैंक से लोन भी मिले है। कॉलोनी में बने ज्यादातर मकानों के लिए लोन नानाखेड़ा स्थित एक ही बैंक ब्रांच से जारी हुए हैं। कोई भी बैंक लोन जारी करने से पहले कॉलोनी की वैधता की जांच जरूर करती है। गायत्री नगर सेक्टर ए के मामले में ऐसा नहीं हुआ।
बैंक के कर्मचारियों ने झूठी सर्च रिपोर्ट बनाई। अब प्रकरण में इनकी भूमिका की भी जांच होगी।
जाचेंगे निगम अधिकारियों की भूमिका
नगर निगम के फर्जी आवक-जावक नंबर, डिजिटल सिग्नेचर, असली बिल्डिंग परमिशन की हुबहू नकल, यह सब अकेले बिल्डर प्रेम विश्वकर्मा के दिमाग की उपज नहीं हो सकती है। पुलिस को शुरूआती जांच में संदेह है कि नगर निगम के भी कुछ लोग इस मामले में संलिप्त हो सकते है।
प्रेम विश्वकर्मा की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को यह पता करना होगा कि आखिर उसके पास फर्जी परमिशन कहां से आई थी, किसने उसे जाली दस्तावेज उपलब्ध कराए थे।
इनका कहना
पांच लोग ऐसे मिले हैं जिनके साथ बिल्डर ने धोखा किया है, फिलहाल हमारे पास दो ही लोग पहुंचे हैं। बिल्डर की तलाश की जा रही है। उसके गिरफ्तार होने के बाद आगे की कडिय़ा जुड़ सकेंगी।- यादवेंद्र सिंह परिहार, विवेचना अधिकारी