सरकारी जमीन पर बिल्डिंग की अनुमति मामले में लोकायुक्तने मुख्यालय को पत्र लिखा
उज्जैन,अग्निपथ। देवासरोड स्थित करोड़ों की सरकारी जमीन पर बहुमंजिला इमारत का ले आउट व निर्माण स्वीकृति देने के मामले में टीएनसीपी व नगर निगम के अधिकारी उलझ सकते हैं। हालांकि जिम्मेदारों ने गड़बड़ी उजागर होने पर गलती सुधार ली, लेकिन लोकायुक्त ने शिकायत को संज्ञान में लेकर जांच पंजीबद्ध के लिए भोपाल मुख्यालय पत्र लिख दिया।
ऋषिनगर पेट्रोल पंप के पास स्थित सर्वे नंबर 58/2 की 2971.90 वर्गमीटर भूमि पर विक्रमादित्य क्लॉथ मार्केट निवासी महेश पलोड़ ने कब्जे का प्रयास किया था। उसके द्वारा लगाए नजूल का फर्जी अनापत्ति पत्र को परखे बिना टॉउन एंड कंट्री प्लानिंग ने 19 फरवरी 2020 को उसका लेआउट मंजूर कर दिया था। वहीं फर्जी दस्तावेज पेश करने पर नगर निगम की कॉलोनी सेल ने भी बिना पड़ताल बहुमंजिला इमारत बनाने की स्वीकृति दे दी। नतीजतन पलोड़ ने बिल्डिंग बनाना शुरू कर दिया।
धांधली उजागर होते ही दोनों विभागों ने बचने के लिए अनुमति निरस्त कर दी, लेकिन लोकायुक्त ने मामले में अपर आयुक्त मनोज पाठक, कार्यपालन यंत्री रामबाबू शर्मा व बिल्डिंग ऑफिसर मीनाक्षी शर्मा के खिलाफ हुई शिकायत पर संज्ञान ले लिया। उन्होंने मामले में गुरुवार को जांच पंजीबद्ध के लिए मुख्यालय को पत्र लिख दिया। लोकायुक्त अधिकारियों ने इसकी पुष्टि तो की, लेकिन फिलहाल कुछ कहने से इंकार कर दिया।
बचने के लिए इंदौर भेजी फाइल
अपनी धीमी कार्यशैली के कारण चर्चित नगर निगम ने इस निर्माण की अनुमति निरस्त करने में काफी फूर्ति दिखाई। उसकी वजह टीएनसी है। उन्होंने 5 अगस्त को लेआउट निरस्त किया तो निगम अधिकारियों ने भी बचने के लिए 6 अगस्त को अनुज्ञा निरस्त के लिए अधीक्षण यंत्री व नगर निवेश प्रभारी जीके कंठिल को तलाशा। उनके इंदौर में होने का पता चलने पर आनन-फानन में फाइल वहा भेजकर साइन करवाई।
पूर्व में भी गलत अनुमति का केसनियम विरुद्ध तरीके से भवन अनुमति देने नगर निगम में आम बात है। कुछ समय पूर्व ही विक्रम विश्वविद्यालय मार्ग स्थित 40 नंबर बंगले पर व्यवसायिक कांपलेक्स की अनुमति देने की धांधली भी उजागर हुई थी। मामले में अपर आयुक्त मनोज पाठक, कार्यपालन यंत्री रामबाबू शर्मा व बिल्डिंग ऑफिसर मीनाक्षी शर्मा के खिलाफ शिकायत होने पर लोकायुक्त में ने पद का दुरुपयोग का केस दर्ज किया था, जिसकी विवेचना जारी है।