आगर जिले स्थित कानड़ थाने के पुलिसकर्मियों का तालिबानी चेहरा

सन् 1863 में सर चार्ल्स नेपियर द्वारा स्थापित पुलिस प्रणाली आज भी यथावत है। पुलिस एक सुरक्षा बल होता है जो कि नागरिकों की सुरक्षा के लिये ठीक उसी प्रकार कार्य करता है जिस प्रकार किसी देश की बाहरी अनैतिक गतिविधियों से रक्षा के लिये सेना काम करती है। अँग्रेजी के POLICE का शाब्दिक अर्थ होता है P=प्रोटेक्शन O=ऑफ L=लाईफ I=इन C=सिविल E=एस्टाब्लिशमेंट अर्थात विरासत में मिले जीवन की सुरक्षा करने वाले।

पुलिस वह विभाग, दल या संस्था है जो जनता के जान-माल की रक्षा के लिये होती है। पुलिस महकमें की तनख्वाह भी अन्य शासकीय सेवकों की ही तरह जनता के गाढ़े पसीने की कमायी से दी जाती है। जनता की जान-माल की रक्षा के उद्देश्य से स्थापित वही पुलिस थाने आज शोषण उत्पीडऩ, भ्रष्टाचार, अवैध वसूली के केन्द्र बन गये हैं। खाकी वर्दी में छुपे बैठे कुछ शैतान पूरे पुलिस महकमे को कलंकित कर रहे हैं।

ताजा मामला उज्जैन संभाग अंतर्गत आगर जिले के कानड़ पुलिस थाने का है जहाँ के शैतान पुलिस वालों ने अनुसूचित जाति के एक युवक, जो पेशे से पत्रकार होकर काँग्रेस पार्टी के अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष भी है, के साथ बुरी तरह मारपीट की और साथ ही विभिन्न धाराओं में झूठे प्रकरण दर्ज करकर उसे जेल भी भिजवा दिया। इंसानियत को शर्मसार करने वाली इस घटना के बारे में पीडि़त कानड़ निवासी गौरीशंकर सूर्यवंशी ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि चूँकि वह पत्रकार है इस नाते कानड़ क्षेत्र में पुलिस संरक्षण में हो रहे अवैध शराब विक्रय, जुए, सट्टे, अनैतिक कार्यों के समाचार वह प्रकाशित करता था। साथ ही राजनैतिक क्षेत्र में सक्रिय होने के कारण क्षेत्र के नागरिकों की पुलिस थाने से संबंधित समस्याओं को लेकर वह थाने आया जाया करता था।

गौरीशंकर के हस्तक्षेप के कारण पुलिस, थाने पहुँचने वाले लोगों से अवैध वसूली नहीं कर पाती थी साथ ही काले कारनामों के उजागर होने से पुलिस वाले खार खाये बैठे थे। 22 जून 2021 को शाम 7 बजे ग्राम कुंडलाखेड़ा के कुछ ग्रामीणों की समस्याओं को लेकर जब गौरीशंकर कानड़ पुलिस थाने पहुँचा तो उसे देखते ही खाकी वर्दी में छिपी शैतानियत जाग उठी। थाने में तैनात उप निरीक्षक दिलीप कटारे, गणेश जोशी, आरक्षक कमल गुर्जर, आशीष सरिया, आशीष शुक्ला ने उसे गालियां देते हुए कहा कि तू फिर आ गया आज हम सब तेरी नेतागिरी और पत्रकारिता उतार देते हैं।  यह कहकर उसके साथ बुरी तरह मारपीट की जिससे उसके कान का पर्दा भी फट गया।

लहुलुहान स्थिति में उसे लॉकअप में बंद कर दिया गया। पूरी घटना का दुर्भाग्यपूर्ण पहलू यह भी है कि कानड़ थाने में पदस्थ थाना प्रभारी मुन्नी परिहार ने भी लॉकअप में बंद अजा वर्ग के गौरीशंकर के साथ मारपीट की। दुमछल्ले मीडियाकर्मियों की मदद से शैतान पुलिसकर्मियों ने यह समाचार प्रकाशित करवाया कि गौरीशंकर ने पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया जो कि अपने आप में हास्यास्पद है कि एक निरीह और निहत्था नागरिक थाने में पदस्थ पुलिसकर्मियों पर हमला कैसे कर सकता है? और यदि पुलिसकर्मी इस कपोल-कल्पित समाचार के अनुसार हमले में घायल हो गये हैं तो फिर उन्हें पुलिस की नौकरी नहीं करना चाहिये क्योंकि थाने के अंदर एक निहत्थे युवक से इतने सारे पुलिसकर्मी पिट जाये तो ऐसे कायर और बुजदिल पुलिसवालों को अपनी वर्दी जमा कर पुलिस की नौकरी छोडक़र दूसरा काम धंधा देख लेना चाहिये।

खैर, कानड़ थाने की पुलिस के इस दुष्कृत्य का आने वाले समय में सच जरूर सामने आयेगा। मध्यप्रदेश में शिवराज सरकार के कार्यकाल में अजा वर्ग के युवक के साथ पुलिसकर्मियों द्वारा की गयी गुंडागर्दी से पूरी खाकी वर्दी पर कलंक लगा है और पुलिस की वर्दी में छिपे शैतानों का तालिबानी चेहरा भी सामने आया है। पुलिस विभाग की साख को बचाने के लिये पुलिस अधिकारियों को तत्काल इस घटना की जाँच कराकर दोषी पुलिस वालों को निलंबित करना चाहिये।

– अर्जुनसिंह चंदेल

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