कालभैरव गर्भगृह में श्रद्धालुओं का प्रवेश शुरू, मदिरा पान की दी इजाजत

उज्जैन, अग्निपथ। बाबा काल भैरव को आखिरकार गुरुवार से जिला प्रशासन ने मदिरापान करवाने की अनुमति प्रदान कर दी। श्रद्धालुओं का प्रवेश भी शुरू कर दिया गया है। कोरोना संक्रमण के चलते अभी तक बाबा कालभैरव को मदिरापान कराए जाने पर प्रतिबंध लगाया हुआ था। वहां के हार फूल वालों ने नया तरीका इजाद करते हुए बाहर ही मदिरा चढ़ाने की व्यवस्था शुरू कर दी थी। श्रद्धालुओं की आस्था प्रभावित हो रही थी, जिस पर प्रशासन ने संज्ञान लिया।
पटवारी सुभाष शर्मा ने बताया कि गुरुवार को जिला प्रशासन के आदेश पर बाबा कालभैरव को गर्भगृह से मदिरापान करवाने की अनुमति प्रदान कर दी गई। सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा है जोकि बारी-बारी से मदिरा पान करवा रहे थे। तीन-तीन श्रद्धालुओं को सोशल डिस्टेंसिंग के माध्यम से प्रवेश कराया जा रहा था। 8 जून को महाकालेश्वर मंदिर और कालभैरव मंदिर श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल तो दिए गए थे, लेकिन मदिरा पान, प्रसाद चढ़ाने और हार फूल चढ़ाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।

ऐसा जिला प्रशासन ने कोरोना संक्रमण के चलते किया था, लेकिन मंदिर के सामने स्थित देसी और अंग्रेजी शराब की दुकानों को खोलने की अनुमति दे रखी थी, जिसके चलते श्रद्धालु वहां से मदिरा तो खरीद कर ला रहे थे, लेकिन चढ़ा नहीं पा रहे थे और अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहे थे। काल भैरव को मदिरा चढ़ाने की अनुमति नहीं होने के कारण, श्रद्धालु को मदिरा वापस ले जाना पड़ रही थी क्योंकि दुकान वाले भी मदिरा को वापस लेने से इंकार कर रहे थे।

रैलिंग पर चढ़ाने लगे मदिरा

सात महीने से बेरोजगार बैठे हार फूल वालों ने नई व्यवस्था इजाद की और रैलिंग पर मदिरा को चढ़ाना श्रद्धालुओं से शुरू करवा दिया, जिसका नतीजा यह हुआ कि जिला प्रशासन को इसकी जानकारी लगी और उसने ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए इस व्यवस्था को बंद करवा कर गुरुवार से भगवान महाकाल को गर्भगृह से मदिरा चढ़ाने की व्यवस्था प्रारंभ करवा दी। बुधवार तक मदिरा को मंदिर के बाहर एक पात्र में एकत्रित करवाया जा रहा था।

हारफूल प्रसाद अभी-भी बंद

जिला प्रशासन ने भगवान को मदिरा पान तो करवाना शुरू कर दिया है, लेकिन हारफूल प्रसाद पर अभी भी प्रतिबंध लगाया हुआ है, जिसके चलते हारफूल प्रसाद का व्यवसाय करने वाले व्यवसायी परेशान हो रहे है। यदि इन पर लगा हुआ प्रतिबंध हटा लिया जाए तो इन व्यवस्थाओं से जुड़े हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा।

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