व्हीलचेयर कर्मचारी को लेकर अफरा-तफरी संचालन कर रहे पुत्र ने माता को गिराया

कर्मचारी ने होने से व्हील चेयर पर इंतजार करते बुजुर्ग श्रद्धालु।

भारी भीड़ के बीच एक कर्मचारी को व्हीलचेयर पर लगाया, मंदिर समिति के कर्मचारियों का तबादला करने का खामियाजा

उज्जैन, अग्निपथ। श्री महाकालेश्वर मंदिर में तीन व्हीलचेयर कर्मचारियों के तबादला करना महंगा पड़ गया। गुरुवार को एकाएक भीड़ अधिक होने से व्हीलचेयर व्यवस्था बिगड़ गई। बुजुर्ग और दिव्यांग घंटों 5 नंबर गेट के अंदर व्हीलचेयर कर्मचारी का इंतजार करते रहे।

आखिरकार उनके परिजनों ने व्हीलचेयर संचालन किया तो दुर्घटना हो गई। एक पुत्र ने अपनी माता को व्हीलचेयर से मंदिर परिसर में गिरा दिया। यह सब मंदिर के व्हीलचेयर कर्मचारियों का यहां से तबादला करने के कारण हुआ।

बुधवार को तबादला हुए 44 कर्मचारियों ने अपने नये स्थान पर ड्यूटी देना आरंभ किया। मंदिर के पांच नंबर गेट पर सेवा दे रहे व्हीलचेयर कर्मचारी ओम योगी, सतीश चौहान और राधेश्याम बैरागी का भी तबादला कर दिया गया। व्हीलचेयर सेवा केएसएस कंपनी के कर्मचारियों के हाथों में सौंप दी गई।

पूर्व में एक शिफ्ट में तीन कर्मचारी तैनात थे, लेकिन गुरुवार को एक शिफ्ट में एक कर्मचारी को लगाया गया था। 2 से 10 की शिफ्ट में तैनात केएसएस कर्मचारी दशरथ अकेले व्हीलचेयर व्यवस्था संभाल नहीं पाया। ऐसे में वहां पर बुजुर्गों के परिजनों ने अपने हाथ में व्यवस्था लेते हुए व्हीलचेयर संचालन शुरू कर दिया।

पुत्र मां को गिराने पर रोता रहा

मां के व्हील चेयर पर गिरने से आहत बेटा।
मां के व्हील चेयर पर गिरने से आहत बेटा।

एक पुत्र अपनी मां को लेकर व्हीलचेयर से दर्शन कराने के लिए निकला था। लेकिन शाम के समय भारी भीड़ के बीच वह संतुलन कायम नहीं रख सका। उसने मंदिर परिसर में अपनी मां को व्हीलचेयर से गिरा दिया। यह देखकर मंदिर परिसर में अफरातफरी की स्थिति पैदा हो गई। किसी तरह से पुत्र अपनी मां को लेकर पांच नंबर गेट पर पहुंचा और जमकर फूटफूट कर रोया।

कंट्रोल रूम-अधिकारियों के फोन घनघनाते रहे

जानकारी में आया है कि पांच नंबर गेट पर व्हीलचेयर कर्मचारी का इंतजार करते हुए श्रद्धालु परेशान हो गए तो उन्होंने कंट्रोल रूम और मंदिर के अधिकारियों के मोबाइल पर फोन लगा दिए। लेकिन किसी भी अधिकारी ने उनको फोन नहीं उठाया। हां यह अवश्यक हुआ कि कंट्रोल रूम से एनाउंस होता रहा, लेकिन कर्मचारी नहीं होने के कारण आखिरकार श्रद्धालुओं के सब्र का बांध टूट गया और उन्होंने वहां पर रखीं व्हीलचेयरों को अपने कब्जे में लेते हुए अपने बुजुर्ग परिजनों को उसमें बैठा दिया और संचालन खुद ने शुरू कर दिया।

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