महाकाल मंदिरः शंख द्वार से जाते रहे सत्ता पक्ष के नेता और अधिकारियों के परिजन

महाकाल मंदिर जाने वाले लगभग सभी मार्ग हुए जाम हुए-जनता हुई परेशान

उज्जैन, अग्निपथ। श्रावण मास के अंतिम सोमवार को श्री महाकाल मंदिर में जनमैदिनी दर्शन के लिए उमड़ पड़ी। अत्याधिक भीड़ का नजारा भांपते हुए रविवार से ही प्रोटोकाल बंद करने के निर्देश एडीएम ने प्रदान कर दिए थे। यही हाल सोमवार को भी रहा। कहने को प्रोटोकाल को बंद कर दिया गया था लेकिन सत्ता पक्ष के नेतागण और अधिकारी अपने परिवार को दर्शन करवाने के लिए लाते रहे।

भगवान महाकाल की चौथी सवारी के दौरान अत्याधिक भीड़ होने का अनुमान लगाते हुए अधिकारी व्यवस्था में जुटे रहे। राजस्थान के सीकर जिले के खाटु श्याम मंदिर में हादसे के बाद प्रशासन द्वारा भीड़ नियत्रंण पर खास निगाह रखी जा रही थी। श्रावण मास में शिव की आराधना का अंतिम दिन होने के कारण श्री महाकाल मंदिर में देश भर से श्रद्धालु दर्शन को पहुंचे। दोपहर 12 बजे तक हजारों भक्तों ने दर्शन कर लिए थे। हालांकि श्रावण माह शुरू होने के साथ ही प्रतिदिन श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती जा रही है। फिलहाल श्रावण मास समाप्त होने के पहले श्रद्धालुओं की इतनी भीड़ उमड़ी कि बेरिकेट्स खचाखच भरे रहे।

कहने को बंद, लेकिन पीछे से चालू

सोमवार को भी सुबह से ही बढ़ती भीड़ के मद्देनजर एडीएम संतोष टैगोर ने महाकाल मंदिरःप्रोटोकाल व्यवस्था सुबह से ही बंद कर दी थी। केवल सत्ता पक्ष के नेता और अधिकारियों के परिवार को ही प्रोटोकाल पाइंट दिए जा रहे थे।

इनको शंख द्वार से अंदर लिया जा रहा था। इनको रिसीव करने के लिए मंदिर के प्रोटोकाल कर्मचारियों को लगाया गया था। इनको शंख द्वार से लेकर कर्मचारी निर्माल्य गेट, सप्तऋषि मंदिर, आपातकालीन गेट से लेकर अंदर जाते रहे। जिनके पास प्रशासनिक अधिकारियों के पास तक पहुंच थी। उनको भगवान महाकाल के दर्शन प्रोटोकाल से मिल रहे थे। लेकिन मंदिर का प्रोटोकाल को पूरी तरह से बंद कर दिया गया था। इसके साथ 250 रु. के सशुल्क दर्शन टिकट को भी बंद कर दिया गया था।

श्रद्धालुओं को लंबा चक्कर लगाकर सामान्य दर्शनार्थियों की कतार में लगने के बाद दर्शन लाभ मिले।

कभी कार्तिकेय तो कभी गणपति मंडपम से दर्शन

सुबह से ही भीड़ की स्थिति देखने के बाद मंदिर के अधिकारियों ने महाकाल मंदिर की ओर जाने वाले मार्ग को बेरिकेट्स लगाकर बंद कर दिया था। वहीं सामान्य श्रद्धालुओं को केवल कार्तिकेय मंडपम से दर्शन के बाद निर्गम द्वार से बाहर निकाला गया। भीड़ के कम हो जाने के बाद फिर से श्रद्धालुओं को गणपत मंडपम में दर्शन के लिए जाने दिया जा रहा था। यह व्यवस्था इसी तरह दिनभर चलती रही।

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