दो बार प्रशासनिक अधिकारी ने फाइल की वापस, दबाव पूर्वक कर्मचारियों से मांगा चंदा
उज्जैन, अग्निपथ। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में प्रभारी अधिकारी बने प्रभारियों ने अब अपना वेतनमान बढ़वाने के लिए बिल्कुल नया प्रयोग शुरू किया है। एक ओर जहां कर्मचारियों को संगठित करने का प्रयास किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर उनको धोखा देकर अपना वेतनमान बढ़वाने के प्रयास शुरू कर दिए गए हैं।
गणपति बप्पा स्थापना की आड़ में इस नये खेल को शुरू कर दिया गया है। प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों पर दबाव बनाने के लिए आरती में जनप्रतिनिधियों और उनको बुलाकर अपना उल्लू सीधा करने का प्रयास किया जा रहा है।
श्री महाकालेश्वर मंदिर में लड्डू प्रसाद यूनिट, वैदिक शोध संस्थान और महाकाल नि:शुल्क अन्न क्षेत्र में प्रतिवर्ष गणेश स्थापना की जाती थी। लेकिन इस बार भगवान गणेश की स्थापना फेसिलिटी सेंटर में भी की गई। बकायदा दबाव डालकर कर्मचारियों से 500, अधिकारियों से 1000 रु. चंदे की मांग की गई। यह भी कहा गया कि दूसरी जगहों पर गणेश स्थापना नहीं की जाए।
कई कर्मचारियों ने चंदा दे दिया तो कई इतना बड़ा चंदा देने में असमर्थ रहे। 31 अगस्त को गणेश स्थापना फेसिलिटी सेंटर में कर दी गई। इनकी स्थापना करने और चंदा मांगने में प्रभारी अधिकारियों की महती भूमिका रही।
संगठन बनाना भी रहा लक्ष्य
गणेश स्थापना के पीछे एक उद्देश्य कर्मचारियों को संगठित करने का भी रहा है। कर्मचारियों का संगठन बनाकर महाकालेश्वर मंदिर के अधिकारियों पर दबाव बनाने की रणनीति को अमलीजामा पहनाये जाना रही। इसके पीछे अपना वेतनमान बढ़वाने सहित कर्मचारियों के हितों को अधिकारियों के सामने रखना रहा है।
फिलहाल महाकालेश्वर मंदिर में कोई भी संगठन सक्रिय नहीं है। पूर्व में कर्मचारियों ने संगठन बनाने का प्रयास किया था। लेकिन तात्कालिन प्रशासक अवधेश शर्मा और कलेक्टर द्वारा दबाव बनाए जाने के बाद इसको निरस्त कर दिया गया था। उस दौरान विरोध करने वाले मंदिर समिति सदस्य की नेम प्लेट को भी कर्मचारियों ने विरोध स्वरूप तोड़ दिया था।
दूसरी बार आई फाइल वापस
दैनिक अग्निपथ ने अपने पूर्व के अंक में प्रभारी अधिकारियों द्वारा वेतनमान बढ़वाने संबंधी समाचार प्रकाशित किया था। जिसमें बताया गया था कि प्रभारी अधिकारियों द्वारा वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को वेतनमान बढ़ाने संबंधी एक बार फाइल भेजी गई थी। जिस पर टीप लगाकर वापस भेज दिया गया था। इसमें कहा गया था कि….मामला मंदिर प्रबंध समिति की बैठक में रखा जाए।
दूसरी बार फिर से इस फाइल को फारवर्ड किया गया था। तो दूसरी बार भी यही कहा गया कि…बैठक में वेतनमान तय करने संबंधी निर्णय लिया जाएगा। बताया जाता है कि अपने वेतनमान से दुगना लगभग 40 हजार रुपए वेतन बढ़वाने के प्रयास किये जा रहे हैं।
गणपति स्थापना के पीछे का खेल
फेसिलिटी सेंटर में इस बार जो पहली बार गणेश प्रतिमा स्थापना की गई है। उसके पीछे का खेल भी यही है। गणेश स्थापना का उद्देश्य प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों पर दबाव बनाने का है। जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों को आरती करवाने और बुलाने के पीछे यही उद्देश्य समाहित है। इसके सहारे प्रभारी अधिकारी अपना उल्लू सीधा करना चाहते हैं।