बयानों से मुकरी पीडि़ता और गवाह, डीएनए रिपोर्ट के आधार पर दोषी को 20 साल की कैद

न्यायालय

धार, अग्निपथ। नाबालिग से बलात्कार के मामले में कोर्ट ने दोषी को 20 साल कैद की सजा सुनाई है। खास बात यह है कि कोर्ट में पीडि़ता और गवाह में उसके मां-बाप के बयान बदलने के बाद भी कोर्ट ने आरोपी को दोषी करार देते हुए यह सजा सुनाई।

पॉक्सो एक्ट के विशेष न्यायाधीश पंकजसिंह माहेश्वरी ने अपने निर्णय में धर्मेन्द्र पिता रमेश (30) निवाली संजयनगर राऊ जिला इंदौर को लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 की धारा 3/4 (2) में 20 वर्ष का सश्रम कारावास व 1000 रुपए जुर्माना धारा 5(एल)/6 पॉक्सों एक्ट में 20 वर्ष का सश्रम कारावास व 1000रू. जुर्माना धारा-363 भादवि. में 5 वर्ष का सश्रम कारावास व 500 रू. जुर्माना व धारा-366 भादवि. में 07 वर्ष का सश्रम कारावास 500रू. जुर्माना की सजा दी। अर्थदण्ड अदा न करने पर पृथक-पृथक धाराओं में कुल 4 वर्ष का अतिरिक्त कारावास से दण्डित किए जाने की सजा की गई।

अभियोजन मीडिया प्रभारी अर्चना डांगी ने बताया कि पीथमपुर सेक्टर-1 थाने में फरवरी 2020 में पीडि़ता के मामा ने भांजी की गुमशुदगी दर्ज की थी। उसने बताया कि बहन भांजी को रहने के लिए उसके यहां छोडक़र गयी थी। 14 फरवरी 2020 करीब 10 बजे वह काम से पीथमपुर आया था। घर पर उसकी लडक़ी और भांजी थे। एक घंटे बाद वापस लौटा तो भांजी घर पर नहीं थी।

आसपास व रिश्तेदारी में तलाश की किन्तु कोई पता नही चला। उसे शंका है कि कोई अज्ञात बदमाश उसकी भांजी को बहला फुसलाकर ले गया होगा। इस पर पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराने पर अनुसंधान में पीडि़ता को बरामद किया और पूछताछ में उसने बताया कि आरोपी उसे शादी का झांसा देकर बहला फूसलाकर ले गया और उसकी इच्छा के विरूद्ध उससे बलात्कार किया। पॉक्सों अधिनियम 2012 के अन्तर्गत कार्यवाही कर आरोपी को गिरफ्तार किया गया सम्पूर्ण अनुसंधान कर चालान न्यायालय में पेश किया गया।

डीएनए रिपोर्ट बनी सजा का आधार

विचारण के दौरान फरियादी उसके माता-पिता अपने बयानों से पलट गऐ थे, मात्र डी.एन.ए. रिपोर्ट के आधार पर आरोपी को सजा सुनाई। यह कि माननीय न्यायालय ने अपने निर्णय में लेख किया है कि ‘अभियुक्त के द्वारा अवयस्क 18 वर्ष से कम उम्र की बालिका के साथ घिनौना कृत्य किया है समाज में बच्चियों एवं महिलाओं के साथ इस प्रकार के अपराध में काफी बढ़ोतरी हो चुकी है और इस प्रकार के अपराध समाज की नैतिकता को प्रभावित करते है आरोपी के कृत्य को दृष्टिगत रखते हुए दण्ड के संबंध में आरोपी के प्रति उदारता बरती जाना न्यायाचित नहीं है। प्रकरण में अभियोजन की और से पैरवी विशेष लोक अभियोजक आरती अग्रवाल द्वारा की गई।

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