उज्जैन, अग्निपथ। 14-15 दिसंबर को सेंट मेरीज़ कान्वेंट स्कूल उज्जैन के परिसर में हर्ष, उल्लास, रोमांच और आनंद का मनोरम सम्मिश्रण देखा गया। अवसर था संस्थान की स्थापना की हीरक जयंती समारोह के आयोजन का।
मुख्य अतिथि उज्जैन सूबे के बिशप “मार सेबेस्टियन वडक्केल, महू प्रांत की प्रांतीय सुपीरियर सिस्टर मैरियट और कई अन्य गणमान्य की उपस्थिति में कार्यक्रम समृद्ध हुआ। प्राचार्या सिस्टर श्रद्धा ने सभी का शाब्दिक एवं पारंपरिक स्वागत किया। 60 वर्षों की उत्कृष्टता के प्रतीक स्वरूप पूर्व छात्रों, पूर्व शिक्षकों तथा वर्तमान शिक्षकों व छात्रों के प्रतिनिधिमंडल द्वारा मंच से 60 गुब्बारे उड़ाए गए। पारंपरिक कलाकृतियों से सौंदर्यपूर्ण समस्त वातावरण जीवंत था।
मंचीय प्रस्तुतियों के अप्रतिम प्रदर्शन, नृत्य, संवाद, वेशभूषा और मंच की सजावट ने हर किसी को मंत्रमुग्ध कर दिया। अतुलनीय भारत की छवि को प्रदर्शित करते हुए विविध राज्यों के खूबसूरत नृत्यों ने आध्यात्मिक, धार्मिक मनोवृति के साथ पूरे भारत को एक मंच पर ला दिया था। लोकनृत्यों की बानगी जश्न मनाने की मनोदशा का चित्रण थी। नवोदित नन्हे सितारों की प्रदर्शित ऊर्जा ने दर्शकों को अचंभित किया।
समस्त कार्यक्रम की प्रस्तुतियों की विषयवस्तु, उसका प्रवाह, उच्चारण, सामग्री, अनुशासन व आत्मविश्वास सहित हर सूक्ष्म विवरण पर छात्रों व स्कूल प्रबंधन के अथक प्रयास दृष्टव्य रहे। साइबर अपराध पर नुक्कड़ नाटक ने छोटे बड़े हर वर्ग के इस मकडज़ाल में फंँसने और पुन: इसमें से बचने के समाधान को भी प्रस्तुत किया। स्कूल आर्केस्ट्रा ने नए-पुराने गीतों के मिश्रण से संगीत सद्भाव का प्रदर्शन किया। मौलिक व सृजनात्मक जुबली गीत ने गर्मजोशी से उपस्थित जनों का स्वागत करते हुए हीरक जयंती का माहौल तैयार कर दिया था।
26/ 11 की दु:खद घटना की मार्मिक नृत्य नाटिका की प्रस्तुति सोने पर सुहागा की भांँति रही, जिसने शहीदों के परिवारों द्वारा दिए बलिदानों का एक स्पष्ट संदेश दिया। मुख्य अतिथि मार सेबेस्टियन वडक्केल ने अपने प्रेरक शब्दों से सकल सभा को आशीर्वाद दिया। सीनियर सिस्टर मैरियट द्वारा दिए गए उद्बोधन में उन नैतिक सिद्धांतों का व्यापक रूप से वर्णन किया गया जिन्हें स्कूल अपने छात्रों में आत्मसात कराता है। भव्य कार्यक्रम का समापन सामूहिक राष्ट्रगान के साथ हुआ।