जर्जर कारपेट में उलझकर गिर रहे दर्शनार्थी, बदबू भी फैल रही
उज्जैन, अग्निपथ। श्री महाकालेश्वर मंदिर में दर्शनार्थियों की सुविधा के लिए बिछाये गये कारपेट अब परेशानी का कारण बन गये हैं। जर्जर हो चुके इन कारपेट में उलझकर दर्शनार्थी गिरकर घायल हो रहे हैं। वहीं पानी से गीला करने के कारण ये कारपेट सड़ गये हैं और बदबू मार रहे हैं।
गर्मी का दौर शुरू होते ही श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति ने दर्शनार्थियों की सुविधा के लिए मंदिर के आसपास और अंदर खुले स्थान में कारपेट बिछाये थे। ताकि नंगे पैर आने जाने वाले दर्शनार्थियों के पैर नहीं जलें। तेज गर्मी के दौरान मंदिर क्षेत्र में कारपेट बिछाना जरूरी थे। इसी बीच गर्मी और भीषण हुई और मंदिर प्रशासन को इन कारपेट को दिन में कई बार गीला भी करना पड़े। क्योंकि तेज गर्मी के कारण कारपेट भी काफी गरम हो रहे थे।
ऐसे में कारपेट को गीलाकर दर्शनार्थियों को राहत दी गई थी। लेकिन बार-बार गीला होने के कारण ये कारपेट अब सड़ गये हैं। जगह-जगह से फट गये और बदबू भी मारने लगे हैं। खासकर मंदिर क्षेत्र के बाहरी भाग में लगे कारपेट की हालत ज्यादा खस्ता हो गई है।
महिला दर्शनार्थी घायल हुई, अन्य भी चोटिल
दस नंबर गेट के बाहर ढलान का हिस्सा होने के कारण कारपेट बार-बार एक जगह जमा हो जाता है और इसमें उलझकर रोज दर्शनार्थी घायल हो रहे हैं। सोमवार की दोपहर तो उप्र की एक महिला दर्शनार्थी सुमनबाई इन कारपेट में उलझकर घायल हो गई। उनके कमर व पीठ में दबी चोंट आई है। मंदिर के अस्पताल में ही उन्हें प्राथमिक उपचार भी दिया गया। दस नंबर गेट पर मौजूद लोगों का कहना है कि यहां रोज कई दर्शनार्थी इन कारपेट से घायल हो रहे हैं।
जूते-चप्पल के बिखरे रहने से फैल रही है गंदगी
मानसरोवर प्रवेश द्वार के पहले स्थित निर्गम द्वार के पास दर्शनार्थियों के जूते-चप्पल भी फैले रहते हैं। हालांकि मंदिर समिति ने यहीं पर जूता स्टैंड भी बना रखा है। लेकिन इसके बाद भी कई दर्शनार्थी बाहर बेरिकेड्स के सहारे ही जूते-चप्पल छोड़ जाते हैं। हालांकि यहां पर कर्मचारी भी तैनात हैं जिनका काम बाहर बिखरे जूते-चप्पल को जूता स्टेंड पर ले जाकर छोडऩा है। लेकिन यहां बिखरे जूते-चप्पल को देखकर ऐसा नहीं लगता है कि वे अपना काम गंभीरता से कर रहे हैं। इस कारण यहां प्रवेश द्वार पर ही जूते-चप्पल के कारण गंदगी बनी रहती है।