वैज्ञानिक बोले -देश में वैज्ञानिको की कमी, लोग मिल नहीं रहे है, पहली बार ड्रोन द्वारा मिसाइल से अटैक करने में सफलता पाई
उज्जैन, अग्निपथ। विक्रमोत्सव के अंतर्गत तीन दिन तक चलने वाले राष्ट्रीय युवा वैज्ञानिक सम्मेलन, विज्ञान उत्सव और 40वें मध्य प्रदेश युवा वैज्ञानिक सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। इसमें देशभर से 100 से अधिक शीर्ष वैज्ञानिक शामिल होंगे। गुरुवार को मेले शुभारंभ किया गया।
जिसमें ब्रह्मोस मिसाइल बनाने वाले डीआरडीओ के सुधीर मिश्रा, हैदराबाद से प्रकाश चौहान, विक्रम विश्व विद्यालय के कुलगुरु अर्पण भारद्वाज, देवी अहिल्या के कुलगुरु प्रो.राकेश सिंघई, अरविन्द रहाणे सहित, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ रविशंकर भारद्वाज मंच पर उपस्थित रहे। वहीं कार्यक्रम के शुभारम्भ में सीएम डॉ मोहन यादव वर्चुअली जुड़े।
डॉ रविशंकर भारद्वाज ने बताया कि देश भर से आए वैज्ञानिक और छात्र छात्राएं दो दिन विचार विमर्श करेंगे, जिसमें 253 बच्चे 17 विषयों पर शोध पत्र पड़ेंगे। दिन भर सत्र चलेंगे जिसमे स्कूल और कालेज के विद्यार्थी हिस्सा लेंगे। राष्ट्रीय वैज्ञानिक सम्मेलन की थीम ‘विकास की बात विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार के साथ’ पर आधारित है।
सम्मेलन में वैज्ञानिकों द्वारा आधुनिक विज्ञान और भारतीय प्राचीन विज्ञान परंपरा पर विभिन्न सत्रों में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, खगोल विज्ञान, जीआईएस एंड रिमोट सेंसिंग अनुप्रयोग, कृषि एवं ग्रामीण प्रौद्योगिकी, स्टार्टअप, इनोवेशन एवं स्किल डेवलपमेंट, भारतीय ज्ञान विज्ञान परंपरा तथा आधुनिक प्रौद्योगिकी विषयों पर परिचर्चा होगी।
कार्यक्रम में कालिदास अकादमी प्रांगण में कई छात्र छात्राओं ने अपने अपने मॉडल की प्रदर्शनी लगाई जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। सीएम डॉ. मोहन यादव ने वर्चुअली जुडक़र कहा, मध्य प्रदेश में जल्द ही स्पेस पॉलिसी बनेगी, एग्रीकल्चर में ड्रोन अहम भूमिका निभा रहा है,इसरो की तरह मध्य प्रदेश भी सेंट्रल इंडिया में अपना योगदान देने के लिए तैयार है।
देश में वैज्ञानिकों की कमी, लोग मिल नहीं रहे है, खाली पड़ी हुई लैब
डीआरडीओ के पूर्व निदेशक रहे सुधीर मिश्रा ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम से मध्य प्रदेश के युवा वैज्ञानिक को ये पता चलता है कि कितने अवसर है और वे क्या कर सकते है ,अगर वे विज्ञान पड़ेंगे तो कहा तक जा सकते है बच्चो को बताया मैंने की आप क्या कर सकते है। आज के युवा आगामी 20 से 25 साल बाद विज्ञान के क्षेत्र में काम कर देश को दूसरे या पहले स्थान पर ला सकते है।
मध्य प्रदेश के हर जिले में विज्ञान की संस्थान को आकर काम करना चाहिए ,हमारे जितने भी इंजीनियरिंग कालेज और सरकार के रिसर्च सेंटर में इनोवेशन सेंटर बनाए है उनमें लोग आते नहीं या लोग मिल नहीं रहे है, खाली पड़ी हुई लैब, वैज्ञानिक दृष्टिकोण नहीं इसलिए खाई पड़ी है। इन कार्यक्रमों से साइंस की और लगाव बढ़ेगा।
हमारे देश में वैज्ञानिकों की कमी है, एआई भी विज्ञान के क्षेत्र में बड़ा काम कर रहा है। आने वाले दिनों में बहुत से काम और होंगे ,डीआरडीओ ने हाल ही में भारत में पहली बार ड्रोन द्वारा मिसाइल से अटैक करने में सफलता पाई है। महाराजा विक्रमादित्य शोध पीठ के निदेशक श्रीराम तिवारी ने बताया कि कालिदास अकादमी में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन 27-28 मार्च को होगा। 29 मार्च को इसका समापन होगा।
प्रतिभागियों को मिलेगी फैलोशिप
उत्कृष्ट शोधपत्र प्रस्तुत करने वाले प्रतिभागियों को प्रथम पुरस्कार 25,000 रुपए, द्वितीय पुरस्कार 20,000 और तृतीय पुरस्कार 15,000 रुपए प्रदान किया जाएगा। विज्ञान उत्सव में शामिल प्रतिभागियों को मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद द्वारा फैलोशिप दी जाएगी और तकनीकी संस्थानों में इंटर्नशिप के लिए भेजा जाएगा।
स्पेस पॉलिसी के निर्माण और प्रदेश में इसरो के केंद्र के लिए होंगे प्रयास- मुख्यमंत्री डॉ. यादव
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रकृति के अनेक रहस्य सुलझाने की क्षमता विज्ञान में हैं। आज विज्ञान और प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग से अनेक क्षेत्रों में बड़े परिवर्तन हो रहे हैं। फार्मिंग से लेकर फायनेंस तक मैन्यूफैक्चरिंग से लेकर मेडिसिन तक और एजुकेशन से लेकर कम्यूनिकेशन तक प्रत्येक क्षेत्र का स्वरूप परिवर्तित हो रहा है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में गत एक दशक में भारत ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तीव्र प्रगति की है। राष्ट्र में एक नई ऊर्जा और शक्ति का संचार हुआ है। मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत की विजनरी नीति का ही परिणाम है कि भारत डिफेंस और अन्तरिक्ष के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ रहा है। भारत इस क्षेत्र में गलोबल लीडर बन रहा है। मध्यप्रदेश शासन द्वारा शीघ्र ही स्पेस पॉलिसी बनाई जाएगी। प्रदेश में इसरो के केंद्र की शुरूआत के लिए भी मंथन प्रारंभ किया गया है।
हाल ही में जीआईएस के दौरान विज्ञान और प्रौद्योगिकी के उपयोग पर केंद्रित 4 नीतियों को लागू करने की पहल इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरूवार को उज्जैन में हो रहे राष्ट्रीय वैज्ञानिक सम्मेलन/ विज्ञान उत्सव और चालीसवें मध्यप्रदेश युवा वैज्ञानिक सम्मेलन का समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) से वर्चुअल रूप से शुभारंभ करते हुए यह बात कही। यह सम्मेलन कालिदास अकादमी परिसर उज्जैन चल रहा है। कार्यक्रम में कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार गौतम टेटवाल भी वर्चुअल रूप से शामिल हुए।