देवास, अग्निपथ। पागल कुत्ते के काटने से इलाज के दौरान 3 वर्षीय मासूम प्रियांशु 17 दिनों बाद उसकी मौत हो गई। इलाज के दौरान मासूम बच्चे को इंदौर एमवाय अस्पताल रेफर किया गया। जहां डॉक्टरों की लापरवाही सामने आई। दूसरे ही दिन बच्चे की छुट्टी कर घर भेज दिया, जबकि कान, सिर पर 12 टांके आने के बाद भी डॉक्टरों गंभीर हालत में कैसे छुट्टी कर दी।
रसूलपुर में विगत माह 20 फरवरी को मासूम 3 वर्षीय प्रियांश पुत्र सीताराम घर के बाहर खेल रहा था। तभी अचानक एक पागल कुत्ते ने हमला कर दिया। इसके साथ 15 लोगो को काटने की जानकारी भी मिली थी। प्रियांश के पिता सीताराम ने सामाजिक कार्यकर्ता अनिल सिंह ठाकुर को जानकारी देते हुए बताया कि मेरे पुत्र प्रियांशु की कल 3 अप्रैल, गुरुवार को हालत गंभीर होने पर उज्जैन के निर्मला हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया।
जानकारी लगी कि यहां पर कुत्ते से काटने वाले का इलाज किया जाता है। आखिर जीवन और मौत से संघर्ष करते हुए शुक्रवार दोपहर 11.30 बजे मौत हो गई। बालक की मौत की खबर मिलने पर रसूलपुर अन्य लोगों को कुत्ते ने काटा, ऐसी दहशत का माहौल व्याप्त हो गया है। श्री ठाकुर ने आरोप लगाया कि नगर निगम के अधिकारियों की लापरवाही भी सामने आई। निगम की कुत्ते पकडऩे आई टीम दूसरे कुत्ते को पकड़ कर पशु चिकित्सा के डॉक्टर के सुपुर्द कर दिया गया।
जबकि कुत्ता सनफार्मा चौराहा पर एक ट्रक चालक सहित श्रमिक को काटने के बाद लोगों ने पागल कुत्ते को मौत के घाट उतार दिया। नेशनल यूनिटी ग्रुप के संस्थापक अनिल सिंह ठाकुर, सुनील सिंह ठाकुर, हटेसिंह दरबार, अभिषेक सोनी, सीताराम योगी, जय सिंह, सत्यराज सिंह ठाकुर, जितेंद्र मारू, धीरज सेन, लक्ष्मण सिंह ठाकुर, सुभाष वर्मा आदि ने पागल कुत्ते को पकडऩे में लापरवाही बरते जाने पर नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने व पीडि़त परिवार को अतिशीघ्र आर्थिक सहायता प्रदान करने की मांग की है।