हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका, 20 साल पुराना विवाद समाप्त
नलखेड़ा, अग्निपथ। मप्र उच्च न्यायालय, खंडपीठ इंदौर ने एक ऐतिहासिक निर्णय देते हुए नलखेड़ा स्थित माँ बगलामुखी मंदिर के आसपास स्थित प्रसिद्ध श्रीराम मंदिर की बहुमूल्य भूमि पर राज्य शासन का अधिकार एक बार फिर से स्थापित कर दिया है। इस फैसले के साथ दो दशकों से अधिक समय से लंबित यह विवाद समाप्त हो गया है। न्यायालय के फैसले के बाद प्रशासन ने रात में ही मंदिर की जमीन को ताबड़तोड़ अतिक्रमण मुक्त करा लिया है।
उच्च न्यायालय ने राज्य शासन के पक्ष में फैसला सुनाते हुए, प्रतिवादी पक्ष द्वारा दायर प्रथम अपील (एफए/204/2007) को पूर्ण रूप से खारिज कर दिया। यह विवाद वर्ष 1997 में शुरू हुआ था, जब प्रतिवादी पक्ष ने महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाकर और फर्जी आधार पर एक डिक्री (अदालती आदेश) प्राप्त कर ली थी। बाद में इस डिक्री की सत्यता पर सवाल उठे और माननीय अपर जिला न्यायाधीश, आगर ने 14 मार्च 2007 को विस्तृत साक्ष्यों के आधार पर उस डिक्री को अवैध और शून्य घोषित कर दिया था।
उच्च न्यायालय ने अपने निर्णय में स्पष्ट कहा कि 1997 की डिक्री धोखे और दस्तावेजों के दमन से प्राप्त की गई थी और यह विधिक रूप से मान्य नहीं है। न्यायालय ने यह भी माना कि जिस वाद में विवाद स्वयं मंदिर की संपत्ति से संबंधित था, उसमें मंदिर/मूर्ति को पक्षकार तक नहीं बनाया गया था।
न्यायालय ने टिप्पणी की कि प्रस्तुत वसीयतनामा संदेहास्पद था और मूल राजस्व अभिलेख मंदिर/मठ की पारंपरिक गुरु-चेले प्रणाली की पुष्टि करते थे।
इस अत्यंत संवेदनशील प्रकरण में अतिरिक्त महाधिवक्ता आनंद सोनी ने राज्य की ओर से अंतिम सुनवाई में स्वयं उपस्थित होकर प्रभावी तर्क प्रस्तुत किए। उन्होंने राजस्व अभिलेखों, ओकाफ समिति के मूल रिकॉर्ड, मंदिर की ऐतिहासिक संरचना और फर्जी दस्तावेज़ों के पूरे क्रम को न्यायालय के समक्ष स्पष्टता से रखा। अदालत ने माना कि ये तर्क धोखाधड़ी को उजागर करने में सशक्त थे, जिसके माध्यम से भूमि पर गलत तरीके से दावा स्थापित करने की कोशिश की गई थी। इस निर्णय से मंदिर की भूमि पूरी तरह सुरक्षित हो गई है।
राजस्व अभिलेखों की स्थिति
विवादित भूमि राजस्व अभिलेखों के अनुसार ऐतिहासिक रूप से मंदिर/धर्मशाला की रही है और वर्ष 2006-07 से यह संपत्ति विधिवत ‘मूर्ति श्रीराम मंदिर—व्यवस्थापक कलेक्टर’ के नाम दर्ज है। न्यायालय ने कहा कि किसी भी कपटपूर्ण दावे अथवा दस्तावेज़ से मंदिर की संपत्ति पर अधिकार स्थापित नहीं किया जा सकता है।
राज्य शासन ने कहा है कि भविष्य में भी मंदिर संपत्तियों पर किसी भी प्रकार के अवैध दावे, कब्जे या हस्तांतरण के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी ताकि सांस्कृतिक धरोहरें संरक्षित रह सकें।
प्रशासन ने रात में चलाया बुलडोजर चलाकर जमीन से हटाया अवैध कब्जा
उच्च न्यायालय का निर्णय आते ही प्रशासन ने रात्रि में ही ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए बुलडोजर चलाकर श्रीराम मंदिर मूर्ति धर्मशाला की कुछ जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया।
अनुविभागीय अधिकारी (एसडीओ) सर्वेश यादव की अगुवाई में एसडीओपी देवनारायण यादव, तहसीलदार प्रियंक श्रीवास्तव और थाना प्रभारी नागेश यादव मय दलबल बुलडोजर लेकर माँ बगलामुखी मंदिर परिसर पहुँचे। उन्होंने मंदिर परिसर में अवैध रूप से गुमटियों में माला-प्रसाद का व्यापार करने वाले दुकानदारों को 2 घंटे की मोहलत देकर गुमटी हटाने के निर्देश दिए।
इसके बाद रात्रि 9 बजे से अतिक्रमण हटाने की मुहिम शुरू हुई जो सुबह 5:00 बजे तक जारी रही। इस दौरान श्रीराम मंदिर मूर्ति धर्मशाला की भूमि पर से अवैध अतिक्रमण को हटाया गया। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए जिला मुख्यालय आगर से पुलिस बल और वज्र वाहन सहित पुख्ता सुरक्षा इंतजाम किए गए थे।
न्यायालय के फैसले और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में नगरवासी मंदिर पहुंचे, जिससे भीड़ लग गई। पुलिस को भीड़ हटाने के लिए मशक्कत करनी पड़ी।
सीमांकन करवाए
जागरूक नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि श्रीराम मंदिर मूर्ति धर्मशाला की जमीन का एक बार फिर भू-अभिलेख अधिकारी और पटवारी का दल बनाकर निष्पक्ष रूप से सीमांकन करवाना चाहिए, जिससे मंदिर की शेष बची जमीन भी अतिक्रमण मुक्त कराई जा सके।
