उज्जैन, अग्निपथ। हिंदी साहित्य जगत के लिए यह एक गर्व का क्षण है कि देश के सुप्रसिद्ध कवि स्वर्गीय पंडित ओम व्यास ओम’ जी की पिता पर कविता को डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय, छत्रपति संभाजीनगर के स्नातक हिंदी पाठ्यक्रम में आधिकारिक रूप से शामिल कर लिया गया है। यह कविता शैक्षणिक वर्ष 2025-26 से बी.ए. द्वितीय वर्ष के हिंदी पाठ्यक्रम का हिस्सा बनेगी।
ओम व्यास के पुत्र तेजस व्यास ने बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा जारी पाठ्यक्रम संरचना के अनुसार, हिंदी विषय को सेमेस्टर थर्ड एवं फोर्थ में प्रमुख अनिवार्य पाठ्यक्रम के रूप में स्थान मिला है। हिंदी अध्ययन मंडल ने बताया कि ओमजी की रचनाएँ भाषा, समाज और युवा चेतना के बीच सेतु का कार्य करती हैं।
उनकी कविता में हास्य-व्यंग्य, जनसरोकार और संवेदनशीलता का सशक्त समन्वय मिलता है, जो विद्यार्थियों को केवल पाठ्यज्ञान ही नहीं बल्कि विचारशीलता और रचनात्मकता की प्रेरणा भी प्रदान करेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, यह निर्णय नई शिक्षा नीति के अनुरूप साहित्य को अधिक जीवन-सम्बद्ध और छात्र-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
शैक्षणिक वर्ष 2025-26 से लागू होने वाले इस पाठ्यक्रम के अंतर्गत छात्रों को आधुनिक हिंदी कविता की नवीन दृष्टि और समाज से जुड़ाव को समझने का अवसर प्राप्त होगा।
डॉ. अपर्णा पाटिल, अध्यक्ष हिंदी अध्ययन मंडल ने कहा कि इस परिवर्तन से छात्रों को महत्त्वपूर्ण समकालीन साहित्यकारों की उत्कृष्ट कृतियों तक सीधा पहुँच मिलेगी, जिससे साहित्य अध्ययन और भी समृद्ध होगा। पंडित ओम व्यास ओम के पुत्र तेजस व्यास ने इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान न सिर्फ व्यास की रचनात्मक प्रतिभा का गौरव है, बल्कि हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार और साहित्यिक परंपरा के संवर्धन की दिशा में भी सुखद कदम है।
इस निर्णय को साहित्यिक समुदाय द्वारा भी सराहना मिल रही है और उम्मीद है कि इस पहल से नई पीढ़ी में साहित्य के प्रति जागरूकता और लगाव और अधिक मजबूत होगा।
