नेवरी-चटवाड़ा सीसी रोड निर्माण में अफसरों=ठेकेदार की मिलीभगत से मानकों की उड़ी धज्जियां

हातोद, अग्निपथ। हातोद तहसील के ग्राम नेवरी से चटवाड़ा को जोड़ने वाली मुख्य सड़क के निर्माण में लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों और ठेकेदार की सांठगांठ से करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार का बड़ा मामला सामने आया है। स्वीकृत एस्टीमेट और तकनीकी मानकों को पूरी तरह दरकिनार कर बनाई गई यह सड़क कागजों में तो मजबूत दिखाई गई है, लेकिन धरातल पर इसकी स्थिति अत्यंत खोखली है। ग्रामीणों की शिकायत और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के निर्देश के बाद शुक्रवार को कांग्रेस नेता मोतीसिंह पटेल ने तकनीकी विशेषज्ञों के साथ मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य की पोल खोली।

तकनीकी जांच में खुली पोल: गायब मिलीं जरूरी लेयर

निरीक्षण के दौरान साथ रहे सिविल इंजीनियर मोइनुद्दीन कुरैशी ने भौतिक परीक्षण के बाद बताया कि सड़क निर्माण में अनिवार्य ‘बेस’ और ‘लेयर सिस्टम’ को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है। नियमों के अनुसार पुरानी सड़क को हटाकर मजबूत सबग्रेड तैयार करना था, लेकिन ठेकेदार सुरेश माली ने पुराने रोड पर ही सीधे सीसी डाल दी। सड़क से मुरम का बेस, ग्रेन्यूलर सब-बेस (GSB) और मजबूती के लिए अनिवार्य ड्राय लीन कंक्रीट (DLC) की परतें पूरी तरह गायब मिलीं।

एसडीओ और इंजीनियर पर संरक्षण के आरोप

ग्रामीणों ने सीधे तौर पर लोक निर्माण विभाग के एसडीओ राजकुमार जैन और इंजीनियर राजेंद्र सोनी पर ठेकेदार को संरक्षण देने के आरोप लगाए हैं। जांच में पाया गया कि सड़क की मजबूती के लिए हर 32 मीटर पर लगने वाले ‘डोवल बार’ महज 2-3 जगह ही लगाए गए। वहीं, हर 4 मीटर पर होने वाले ‘एक्सपांशन ज्वाइंट’ का कहीं नामोनिशान नहीं है। रोलिंग और कम्पेक्शन की औपचारिकता भी केवल एक बार ही पूरी की गई, जबकि मानकों के अनुसार इसे हर चरण में किया जाना आवश्यक था।

गुणवत्ता परीक्षण के नाम पर खानापूर्ति

सड़क निर्माण के दौरान गुणवत्ता की जांच के लिए अनिवार्य ‘लाइव लोकेशन टेस्ट’ और ‘कंक्रीट क्यूब सैंपल’ का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला है। ठेकेदार के पास कोई मान्यता प्राप्त लैब भी उपलब्ध नहीं है। इंजीनियर कुरैशी के अनुसार, बिना किसी तकनीकी नियंत्रण के किया गया यह निर्माण सरकारी धन की खुली बर्बादी है और यह सड़क बहुत जल्द धंस सकती है या इसमें बड़ी दरारें आ सकती हैं।

उच्च स्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग

कांग्रेस नेता मोतीसिंह पटेल ने इस पूरे प्रकरण को सरकारी धन की लूट और ग्रामीणों के साथ धोखाधड़ी करार दिया है। उन्होंने मांग की है कि एक स्वतंत्र एजेंसी से इस निर्माण की पुनः जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों सहित ठेकेदार के खिलाफ कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाए। फिलहाल, करोड़ों की लागत से बनी यह सड़क भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती दिखाई दे रही है और अब गेंद शासन-प्रशासन के पाले में है।

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