उज्जैन को ‘ग्रोथ सेंटर’ के रूप में विकसित करने के लिए नीति आयोग ने तैयार किया रोडमैप

ज्जैन, अग्निपथ। रविवार को भारत सरकार के नीति आयोग की मुख्य आर्थिक सलाहकार सुएना रॉय द्वारा प्रशासनिक संकुल भवन के सभाकक्ष में उज्जैन क्षेत्र के विकास और नीति निर्धारण के संबंध में एक महत्वपूर्ण बैठक ली गई। बैठक में सीईओ जिला पंचायत श्रेयांस कूमट, एमपीआईडीसी के क्षेत्रीय महाप्रबंधक राजेश राठौर, स्मार्ट सिटी सीईओ संदीप शिवा सहित नीति आयोग के वरिष्ठ अधिकारी और विभिन्न विभागों के जिला अधिकारी उपस्थित थे।

बैठक में सुएना रॉय ने कहा कि उज्जैन को एक प्रमुख विकास केंद्र (ग्रोथ सेंटर) के रूप में स्थापित करने के लिए शहरी क्षेत्रों का नियोजित विकास अनिवार्य है। उन्होंने ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए बेहतर अर्बन प्लानिंग और आर्थिक दृष्टिकोण के साथ कार्ययोजना बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि उज्जैन को एक स्वतंत्र और विकसित शहर बनाने के लिए आयोग लंबे समय से शोध कर रहा है और अब बुनियादी दृष्टिकोण बदलने की आवश्यकता है।

सिंहस्थ 2028 और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर विशेष ध्यान

बैठक के दौरान सीईओ जिला पंचायत श्रेयांस कूमट ने बताया कि आगामी सिंहस्थ महापर्व 2028 को ध्यान में रखते हुए उज्जैन में 25 नई सड़कों का निर्माण और पुरानी सड़कों के चौड़ीकरण का कार्य किया जा रहा है। शिप्रा नदी के समानांतर एमआर-5 सड़क का निर्माण किया जा रहा है, जो सिंहस्थ बायपास से मेला क्षेत्र को जोड़ते हुए नदी किनारे स्थित सभी घाटों और मंदिरों को आपस में जोड़ेगी।

इसके अतिरिक्त 29 किलोमीटर के नए घाट, कान्ह क्लोज डक्ट परियोजना और वीर भारत संग्रहालय जैसे प्रोजेक्ट्स पर भी जानकारी दी गई। सुएना रॉय ने सुझाव दिया कि शहर के विकास के लिए केवल धार्मिक पर्यटन ही नहीं, बल्कि आईटी पार्क, मेडिसिटी, डेयरी प्रोडक्ट्स और सर्विस सेक्टर को भी बढ़ावा देना होगा ताकि स्थानीय लोगों को रोजगार मिले और पलायन रुके।

औद्योगिक निवेश और एग्रो प्रोसेसिंग यूनिट्स पर जोर

एमपीआईडीसी के क्षेत्रीय महाप्रबंधक राजेश राठौर ने बताया कि वर्तमान में उज्जैन जिले में लगभग 20 हजार करोड़ रुपये का निवेश आ चुका है। विक्रम उद्योगपुरी के सफल संचालन के बाद अब नागदा के पास कचनारिया में भी औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जाएंगे। नीति आयोग ने सुझाव दिया कि उज्जैन की मुख्य कृषि फसलों के लिए स्थानीय स्तर पर ही ‘एग्रो प्रोसेसिंग यूनिट्स’ और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित की जानी चाहिए ताकि किसानों की आय बढ़ सके।

नीति आयोग के अधिकारी अखिलेश बाबेल ने मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स में एआई (AI) तकनीक के उपयोग और उज्जैन के अन्य प्रमुख मंदिरों तक श्रद्धालुओं की पहुंच बढ़ाने के लिए कनेक्टिविटी बेहतर करने पर जोर दिया। बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं, पशुपालन और उद्यानिकी विभाग की योजनाओं पर भी विस्तार से चर्चा कर भविष्य की नीतियों का निर्धारण किया गया।

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