शाजापुर : जिला अस्पताल में अव्यवस्था का अंबार; सिविल सर्जन को लगी फटकार

जिला अस्पताल में अव्यवस्था

शाजापुर, अग्निपथ। जिला अस्पताल की चरमराती स्वास्थ्य व्यवस्थाओं और डॉक्टरों की लापरवाही का काला सच गुरुवार को सबके सामने आ गया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. कमला आर्य जब औचक निरीक्षण पर पहुंचीं, तो अस्पताल में बदइंतजामी का आलम देखकर दंग रह गईं। ड्यूटी से नदारद डॉक्टरों और अव्यवस्थाओं को लेकर उन्होंने सिविल सर्जन डॉ. बी.एस. मैना को कड़े लहजे में फटकार लगाते हुए कहा कि आप जिम्मेदारी समझने के बजाय गप्पे लड़ा रहे हैं।

घंटों इंतजार में तड़पती रहीं गर्भवती महिलाएं

अस्पताल के मातृ एवं शिशु भवन में मानवता को शर्मसार करने वाला नजारा दिखा। दूर-दराज के गांवों से आई गर्भवती महिलाएं सोनोग्राफी के लिए सुबह से भूखी-प्यासी कतार में लगी थीं, लेकिन घंटों बीत जाने के बाद भी डॉक्टर अपने कक्ष में नहीं पहुंचे। महूपुरा निवासी कान्हा जाटव ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि वे घंटों भटकते रहे, लेकिन मदद के बजाय उन्हें पुलिस का डर दिखाकर चुप कराने की कोशिश की गई।

न डॉक्टर मिले, न स्टाफ; वार्डों में लटके मिले ताले

सीएमएचओ डॉ. कमला आर्य ने जब अस्पताल के विभिन्न वार्डों का रुख किया, तो स्थिति और भी भयावह मिली। कई महत्वपूर्ण कक्षों में ताले लटके हुए थे और ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर व नर्स गायब थे। यहां तक कि सुरक्षा गार्ड भी अपनी पोस्ट पर नहीं थे। सोनोग्राफी कक्ष की नर्स तो मौके पर पहुंची अधिकारी को पहचान तक नहीं पाई, जिससे स्पष्ट हुआ कि अस्पताल में अनुशासन और मॉनिटरिंग का पूरी तरह अभाव है।

अधिकारियों के बीच तीखी बहस: “अपनी भाषा नीची रखिए”

निरीक्षण के दौरान जब सीएमएचओ ने सिविल सर्जन डॉ. मैना से डॉक्टरों के ड्यूटी चार्ट और उनकी लोकेशन के बारे में पूछा, तो उन्होंने अनभिज्ञता जाहिर कर दी। इस पर विवाद इतना बढ़ गया कि सीएमएचओ ने सख्त लहजे में कहा, “सारे डॉक्टर चैंबर में बंद हैं और आपको पता ही नहीं है कि किसकी ड्यूटी कहां है? आप सिविल सर्जन हैं, अपनी भाषा नीची रखिए और पहले जिम्मेदारी सुनिश्चित कीजिए।”

मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रही आपसी खींचतान

स्थानीय नागरिकों और मरीजों के परिजनों का आरोप है कि जिला अस्पताल में डॉक्टरों की मनमानी अब बर्दाश्त से बाहर हो गई है। अधिकारियों के बीच समन्वय की कमी और खींचतान का सीधा असर गरीब मरीजों पर पड़ रहा है। जो अस्पताल जीवन देने के लिए है, वहां घंटों लाइन में लगने के बाद भी मरीजों को केवल आश्वासन और दुर्व्यवहार ही मिल रहा है।

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