उज्जैन, अग्निपथ। मलमास समाप्त होते ही मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो गई है। वैवाहिक आयोजनों के लिए प्रथम पूज्य भगवान गणेश को निमंत्रण देने हेतु ऐतिहासिक चिंतामन गणेश मंदिर में भक्तों का सैलाब उमड़ रहा है। लोग अपनी शादियों की पहली पत्रिका और नारियल भगवान के चरणों में अर्पित करने पहुंच रहे हैं, लेकिन मंदिर प्रबंधन और पुजारियों के व्यवहार से श्रद्धालुओं में भारी रोष व्याप्त है।
पत्रिका चढ़ाने के नाम पर 500 रुपये की ‘अवैध’ मांग
मंदिर में दर्शन के लिए आए श्रद्धालुओं ने गंभीर आरोप लगाया है कि जब वे भगवान को निमंत्रण पत्र सौंपने पहुंचे, तो वहां मौजूद पुजारियों ने बदले में सीधे 500 रुपये की मांग की। यह मांग किसी एक व्यक्ति से नहीं, बल्कि प्रत्येक उस भक्त से की जा रही है जो पत्रिका लेकर आ रहा है। भक्तों का कहना है कि जो व्यक्ति 500 रुपये की भेंट दे रहा है, केवल उसकी ही पत्रिका भगवान के चरणों में रखी जा रही है, जबकि अन्य श्रद्धालुओं की पत्रिका स्वीकार नहीं की जा रही है। इस कथित वसूली को लेकर मंदिर में कई बार श्रद्धालुओं और पुजारियों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई।
आम भक्तों के साथ दुर्व्यवहार और वीआईपी कल्चर
श्रद्धालुओं ने बताया कि मंदिर के गर्भगृह में भारी पक्षपात किया जा रहा है। पैसे देने वाले विशिष्ट लोगों को घंटों पूजा कराई जाती है, वहीं यदि कोई साधारण भक्त प्रवेश करने की कोशिश करता है, तो उसे पंडितों द्वारा धक्का देकर बाहर निकाल दिया जाता है। पुजारियों के इस व्यवहार से दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुँच रही है।
मंदिर परिसर में सुरक्षा और स्वच्छता का अभाव
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मंदिर के मुख्य द्वार पर तैनात सुरक्षा गार्ड दिन भर मोबाइल में व्यस्त रहते हैं। आरोप है कि गार्ड मंदिर के पीछे का दरवाजा खोलकर मनमाने ढंग से लोगों को प्रवेश दे रहे हैं। इसके अतिरिक्त, मंदिर परिसर में आवारा कुत्तों का जमावड़ा लगा रहता है, जो अब तक कई दर्शनार्थियों को अपना शिकार बना चुके हैं। मंदिर समिति प्रभारी की लापरवाही के कारण पूरा मंदिर क्षेत्र अव्यवस्थाओं का केंद्र बना हुआ है।
प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग
भक्तों ने जिला प्रशासन, एडीएम और कलेक्टर से मांग की है कि इस अवैध वसूली और मंदिर की बदहाली को तत्काल संज्ञान में लिया जाए। क्या प्रशासन ने भेंट पूजा के लिए कोई आधिकारिक दर तय की है? यदि नहीं, तो दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भक्तों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ न हो।
