धार, अग्निपथ। सरकार एक ओर ‘अनुभूति’ कार्यक्रमों के जरिए विद्यार्थियों को प्रकृति से जोड़ने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर धार वन विभाग के अधिकारी इस आयोजन की आड़ में अपनी मूल जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं। बुधवार को जिले के वन विभाग कार्यालयों में जो तस्वीर सामने आई, उसने प्रशासनिक व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी है। कार्यालय समय के दौरान महत्वपूर्ण दफ्तरों में ताले लटके रहे और फरियादी घंटों इंतजार के बाद खाली हाथ लौटने को मजबूर हुए।
दफ्तरों में पसरा सन्नाटा, चपरासी के भरोसे करोड़ों की संपत्ति
आयोजन के नाम पर रेंजर ऑफिस गंजीखाना जैसे महत्वपूर्ण कार्यालयों के मुख्य गेट पर बुधवार को दिनभर ताला जड़ा रहा। आलम यह था कि करोड़ों की सरकारी संपत्ति और महत्वपूर्ण दस्तावेजों वाला यह कार्यालय महज एक चपरासी के भरोसे छोड़ दिया गया। दूर-दराज के क्षेत्रों से अपनी शिकायतें और आवेदन लेकर पहुंचे ग्रामीण और फरियादी कार्यालय बंद देख मायूस नजर आए। शाम तक कार्यालय के ताले नहीं खुले, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मुख्य डिवीजन कार्यालय से भी अधिकारी गायब
जब मीडिया टीम स्थिति का जायजा लेने मुख्य डिवीजन कार्यालय पहुँची, तो वहां के हालात और भी चौंकाने वाले थे। दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक कार्यालय में कोई जिम्मेदार अधिकारी मौजूद नहीं था। कुछ विभागों में ताले लटके थे तो कहीं केवल चपरासी मोबाइल चलाते नजर आए। पत्रकार के पहुँचने की सूचना मिलने के बाद आनन-फानन में कुछ कर्मचारी कार्यालय लौटे। डीएफओ भी शासकीय कार्य का हवाला देकर कार्यालय में मौजूद नहीं थे। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि पूरा स्टाफ एक ही कार्यक्रम में चला जाएगा, तो सामान्य जनता की सुनवाई कौन करेगा?
डीएफओ का तर्क: “कर्मचारियों को लंच पर आमंत्रित किया था”
इस पूरे मामले पर जब डीएफओ विजयांतम टी.आर. से चर्चा की गई, तो उनका तर्क हकीकत से परे नजर आया। उन्होंने कहा कि अनुभूति कार्यक्रम में रेंजर की मौजूदगी रहती है और लंच के लिए कार्यालय के अन्य कर्मचारियों को आमंत्रित किया गया था। हालांकि, जमीनी हकीकत यह थी कि दोपहर 2 बजे से ही दफ्तरों में ताले लग गए थे जो शाम तक नहीं खुले। डीएफओ का यह जवाब विभागीय लापरवाही को ढकने की कोशिश माना जा रहा है। अब देखना यह है कि क्या वन वृत्त इंदौर के सीसीएफ पी.एन. मिश्रा इस घोर लापरवाही पर कोई कड़ा संज्ञान लेंगे।
