जनहित याचिका की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा; वीआईपी दर्शन का निर्णय कलेक्टर ही लेंगे
उज्जैन, अग्निपथ। उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर के गर्भगृह में वीआईपी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका खारिज हो गई है। मंगलवार को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के फैसले को ही बरकरार रखा है। जिसमें कहा गया है कि मंदिर में वीआईपी दर्शन व्यवस्था तय करने का अधिकार कलेक्टर को है।
इस मामले में जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए पूर्व में हाईकोर्ट निणर्य सुनाया था कि महाकाल मंदिर के गर्भगृह में किसे प्रवेश देना किसे नहीं यह कलेक्टर अपने विवेक से तय कर सकते है। इंदौर के अधिवक्ता चर्चित शास्त्री और दर्पण अवस्थी ने यह याचिका दायर की थी। इसके बाद दोनों ने इसी मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की जिस पर मंगलवार को सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उक्त याचिका को खारिज करते हुए में हाईकोर्ट द्वारा पूर्व में दिए गए निर्देश को ही बरकरार रखा है। उल्लेखनीय है कि देशभर से लाखों श्रद्धालु महाकाल दर्शन के लिए प्रतिदिन उज्जैन में उमड़ते हैं, लेकिन उन्हें गर्भगृह के बाहर से ही दर्शन करने पड़ते हैं, जबकि नेता और प्रभावशाली लोग आसानी से गर्भगृह में प्रवेश कर पूजा-अर्चना कर चले जाते हैं।
साल 2023 में श्रावण मास के दौरान बंद किया था गर्भगृह
महाकाल मंदिर के गर्भगृह में पहले आम दर्शन के साथ ही गर्भगृह के अंदर से भी 1500 की रसीद पर दो लोगों के लिए दर्शन व पूजन की व्यवस्था लागू थी। लेकिन 4 जुलाई 2023 में श्रावण मास के दौरान भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर के गर्भगृह में 11 सितंबर 2023 तक प्रवेश बंद करने के आदेश जारी किए थे। इसके बाद से आज तक प्रवेश चालू नहीं किया गया। महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ तो साल 2022 में महाकाल लोक बनने के बाद से ही बढ़ना शुरू हो गई थी।
उज्जैन के सांसद और महापौर भी कर चुके गर्भगृह से दर्शन की मांग
मंदिर में वर्तमान में गणेश मंडप, कार्तिके मंडप और नंदी हॉल से श्रद्धालुओं को व्यवस्था अनुसार दर्शन करवाए जा रहे हैं, लेकिन आम श्रद्धालु गर्भगृह में प्रवेश नहीं कर पा रहे हैं। जबकि नेता, संत, पुजारी व अन्य कई वीआईपी लोग अंदर जाकर दर्शन-पूजन करते हैं। इसे लेकर उज्जैन के मौजूदा सांसद अनिल फिरोजिया ने गर्भगृह में आम श्रद्धालुओं के लिए खोलने की मांग की थी। उन्होंने पत्र जारी किया और सार्वजनिक मंच पर मुख्यमंत्री मोहन यादव से इस पर कदम उठाने का अनुरोध किया। दो हफ्ते पहले उज्जैन के महापौर मुकेश टटवाल ने भी दर्शन व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए और आम श्रद्धालुओं को गर्भगृह से दर्शन दिलाने की मांग की थी।
