मंदसौर में ‘पशुपतिनाथ लोक’ का भव्य लोकार्पण

अष्टमुखी महादेव के दरबार में बिखरी महाकाल लोक जैसी आभा

मंदसौर, अग्निपथ। मध्य प्रदेश के धार्मिक पर्यटन में आज एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को मंदसौर पहुँचकर शिवना नदी के पावन तट पर 25 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित ‘पशुपतिनाथ लोक’ का भव्य लोकार्पण किया। उज्जैन के महाकाल लोक की तर्ज पर विकसित इस कॉरिडोर ने अष्टमुखी भगवान पशुपतिनाथ मंदिर की सुंदरता में चार चाँद लगा दिए हैं। मुख्यमंत्री ने परिसर में स्थापित 22 फीट ऊंचे ‘त्रिनेत्र’ का अनावरण कर इस लोक को जनता को समर्पित किया।

ई-कार्ट से भ्रमण और महायज्ञ में आहुति

लोकार्पण समारोह की शुरुआत मुख्यमंत्री द्वारा भगवान पशुपतिनाथ के दर्शन और विशेष आरती के साथ हुई। इसके बाद सीएम ने परिसर में आयोजित महायज्ञ में पूर्णाहूति दी। मंदिर की व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए मुख्यमंत्री ने ई-कार्ट वाहन का सहारा लिया और पूरे कॉरिडोर का बारीकी से निरीक्षण किया। इस दौरान उनके साथ उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, राज्यसभा सांसद बंशीलाल गुर्जर और अन्य वरिष्ठ जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

भक्तों के लिए क्या है खास: त्रिनेत्र, डमरू और लाल पत्थरों की नक्काशी

पशुपतिनाथ लोक को 15 बीघा क्षेत्र में राजस्थान के लाल पत्थरों से पारंपरिक नक्काशी के साथ तैयार किया गया है। यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मुख्य आकर्षण निम्नलिखित हैं:

  • विशाल त्रिनेत्र: परिसर में 22 फीट ऊंचा त्रिनेत्र स्थापित है, जिसके मध्य में भव्य रुद्राक्ष विराजमान है।

  • म्यूरल वॉल और पेंटिंग्स: दीवारों पर भगवान शिव की लीलाओं और पशुपतिनाथ के इतिहास को कलाकृतियों के माध्यम से उकेरा गया है।

  • अयोध्या शैली के द्वार: लोक में प्रवेश के लिए अयोध्या की स्थापत्य कला से प्रेरित भव्य प्रवेश द्वार बनाए गए हैं।

  • आधुनिक सुविधाएं: यहाँ सुंदर बगीचे, सरोवर, पूजन सामग्री की दुकानें, रेस्टोरेंट और भक्तों के बैठने के लिए विशाल प्रतीक्षालय बनाया गया है।

तीन राज्यों के कारीगरों की कड़ी मेहनत

इस भव्य कॉरिडोर को साकार करने में मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात के 100 से अधिक कुशल मजदूरों ने करीब 2 साल 4 महीने तक निरंतर श्रम किया है। सुरक्षा के लिहाज से पूरे परिसर को आधुनिक सीसीटीवी कैमरों और कंट्रोल रूम से लैस किया गया है। श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु प्राथमिक चिकित्सा कक्ष और विशाल पार्किंग की व्यवस्था भी की गई है।

प्रतिमा का संरक्षण और गर्भगृह की स्थिति

नेपाल के काठमांडू में स्थित पशुपतिनाथ मंदिर में जहाँ चार मुख वाली प्रतिमा है, वहीं मंदसौर में भगवान की अष्टमुखी प्रतिमा विराजमान है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की पश्चिम बंगाल से आई टीम ने हाल ही में प्रतिमा का संरक्षण कार्य पूर्ण किया है। प्रतिमा को खरोंचों से बचाने और सुरक्षित रखने के लिए वर्तमान में गर्भगृह में भक्तों का प्रवेश प्रतिबंधित है, श्रद्धालु बाहर से ही बाबा के दर्शन कर पा रहे हैं।

ऐतिहासिक घोषणा से लोकार्पण तक का सफर

पशुपतिनाथ लोक की आधारशिला पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 8 दिसंबर 2022 को मंदसौर गौरव दिवस पर रखी थी। स्थानीय जनता और जनप्रतिनिधियों की मांग पर इस कॉरिडोर की घोषणा की गई थी, जिसका भूमि पूजन 6 अक्टूबर 2023 को हुआ था। आज यह लोक पूरी तरह तैयार होकर श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए सज चुका है।

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