शाजापुर, अग्निपथ। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय ने गुरुवार को एक हृदय विदारक हत्याकांड में अपना महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए आरोपी पति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। न्यायालय ने दुपाड़ा निवासी 33 वर्षीय टीपू उर्फ शहरयार को अपनी पत्नी रुखसार की नृशंस हत्या का दोषी पाया और उस पर 2000 रुपये का अर्थदंड भी अधिरोपित किया। अभियोजन पक्ष के पुख्ता साक्ष्यों के साथ-साथ 5 वर्षीय मासूम बेटे की चश्मदीद गवाही ने इस केस की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाई।
संदेह की आग में उजाड़ा अपना ही संसार
अभियोजन के अनुसार, यह दर्दनाक घटना 23 जून 2024 की है। आरोपी टीपू अपनी पत्नी के चरित्र पर संदेह करता था, जिसके कारण घर में आए दिन कलह और मारपीट होती थी। घटना वाली रात इसी विवाद ने उग्र रूप ले लिया और आरोपी ने अपनी पत्नी पर चाकू से जानलेवा हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया। सुबह जब सूचनाकर्ता नौशाद खां की जानकारी पर परिजन मौके पर पहुंचे, तो रुखसार मृत अवस्था में मिली और आरोपी फरार हो चुका था।
5 वर्षीय अबोध बालक ने बयां की पिता की क्रूरता
इस मामले की विवेचना में सबसे भावुक और अहम मोड़ तब आया, जब मृतिका के 5 साल के बेटे ने पुलिस के सामने पिता की करतूत का खुलासा किया। बच्चे ने साहस दिखाते हुए बताया कि उसने अपनी आँखों से पिता को माँ के पेट में चाकू मारते देखा था। न्यायालय ने मासूम के बयानों और चिकित्सकीय रिपोर्ट के आधार पर आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दोषी ठहराया। माननीय न्यायाधीश ने सजा सुनाते हुए स्पष्ट किया कि इस प्रकार के जघन्य अपराध समाज में बर्दाश्त नहीं किए जा सकते।
