पुलिस की वर्दी में इतिहासकार: डीएसपी आनंद तिवारी ने लिखी धार की ऐतिहासिक जल संरचनाओं पर पुस्तक

धार, अग्निपथ। धार जिले में पदस्थ उप पुलिस अधीक्षक आनंद तिवारी ने पुलिस ड्यूटी की व्यस्तताओं के बीच शहर की ऐतिहासिक धरोहरों को सहेजने का सराहनीय कार्य किया है। उन्होंने धार की प्राचीन जल संरचनाओं और देवस्थानों पर गहन शोध कर ‘नगर की प्राचीन जल संरचनाएं’ नामक पुस्तक लिखी है, जिसका हाल ही में समारोहपूर्वक विमोचन किया गया। यह पुस्तक राजा भोज के काल की वैज्ञानिक और दूरदर्शी सोच को समाज के सामने लाने का एक प्रयास है।

राजा भोज के काल का वैज्ञानिक जल प्रबंधन

डीएसपी आनंद तिवारी ने बताया कि राजा भोज के शासनकाल में धार में साढ़े 12 तालाबों और अनेक बावडियों का निर्माण कराया गया था। ये संरचनाएं केवल जलस्रोत नहीं हैं, बल्कि उस दौर के उन्नत जल प्रबंधन का प्रमाण हैं। सैकड़ों वर्षों से ये तालाब और कुएं न केवल धरती की प्यास बुझा रहे हैं, बल्कि नगर के जीवन और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बने हुए हैं। धार में कोई बड़ी नदी न होने के बावजूद इन तालाबों ने सदियों से जल संकट का स्थाई समाधान किया है।

प्रकृति और आस्था का अनूठा संगम

पुस्तक में धार के प्राचीन तालाबों, कुओं और बावडियों के साथ उनके समीप स्थित देवस्थानों और प्राकृतिक परिवेश का विस्तृत उल्लेख है। मूंज सागर और धूप तालाब पर हर वर्ष आने वाले प्रवासी पक्षियों और नटनागरा तालाब के समीप स्थित शहतूत के पेड़ों और समृद्ध जैव विविधता का वर्णन इसमें प्रमुखता से किया गया है। लेखक के अनुसार, ये जलस्रोत और देवस्थान आस्था और प्रकृति के गहरे संबंध को दर्शाते हैं।

पुलिस महकमे के आला अधिकारी रहे मौजूद

विमोचन कार्यक्रम में इंदौर संभाग के कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शामिल हुए। समारोह में मुख्य रूप से पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विजय डावर, पारूल बेलापुरकर, धनंजय शाह, अमृत मीणा एवं शेरसिंह भूरिया विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन रक्षित निरीक्षक धार पुरुषोत्तम बिश्नोई द्वारा किया गया।

अस्तित्व बचाने और संरक्षण का आह्वान

नगर विस्तार के कारण वर्तमान में कई ऐतिहासिक जलस्रोतों का अस्तित्व संकट में है। डीएसपी तिवारी ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि समय रहते इन संरचनाओं को नहीं बचाया गया, तो भविष्य में भारी जल संकट खड़ा हो सकता है। उन्होंने नगरवासियों से अपनी विरासत और अगली पीढ़ी के लिए इन जल स्रोतों के संरक्षण का आह्वान किया है, ताकि धार की पहचान एक हरित शहर के रूप में बनी रहे।

Next Post

उज्जैन : जनवरी के आखिरी सप्ताह में बढ़ी ठंड, रात के पारे में फिर गिरावट

Fri Jan 30 , 2026
न्यूनतम तापमान 11 डिग्री तक गिरा, सुबह सडक़ें खाली, ठिठुरते दिखे स्कूल जाने वाले बच्चे उज्जैन, अग्निपथ। उत्तर भारत में हो रही जमकर बर्फबारी से जनवरी के आखिरी सप्ताह में ठंड का असर एक बार फिर तेज हो गया है। सुबह के समय शहर की प्रमुख सडक़ें लगभग खाली नजर […]

Breaking News