शाजापुर, (अजय गोस्वामी) अग्निपथ। राजनीति में जब विकास की गति विरोधियों की सहनशक्ति से बाहर हो जाती है, तो अक्सर ‘गुमनाम पत्रों’ और ‘छवि हनन’ के हथियारों का इस्तेमाल शुरू हो जाता है। शाजापुर विधानसभा में इन दिनों ठीक यही नजारा देखने को मिल रहा है।
विधायक अरूण भीमावद के कार्यकाल में हुए बुनियादी बदलावों और प्रशासनिक कसावट के बीच, एक कथित ‘चिट्ठी कांड’ ने जिले की सियासत में उबाल ला दिया है। लेकिन क्या यह चिट्ठी भ्रष्टाचार का खुलासा है या केवल राजनीतिक हताशा का एक दस्तावेज?
धरातल पर नजर आ रहा जिले का विकास: दावों की हकीकत
किसी भी जन-प्रतिनिधि के मूल्यांकन का सबसे सटीक पैमाना ‘धरातल’ होता है। अरूण भीमावद के कार्यकाल में शाजापुर ने चिकित्सा, शिक्षा, और अधोसंरचना के क्षेत्र में जो छलांग लगाई है, वह कागजी नहीं बल्कि सबके सामने है।
असामाजिक तत्वों द्वारा प्रसारित पत्र के आठ अध्यायों का यदि निष्पक्ष विश्लेषण किया जाए, तो वे तथ्य की कसौटी पर टिकते नजर नहीं आते। जिले के प्रबुद्ध वर्ग का मानना है कि यह पत्र केवल व्यक्तिगत विद्वेष और विधायक की बढ़ती लोकप्रियता को रोकने का एक असफल प्रयास है।
भूमाफियाओं में हड़कंप: कार्रवाई की बौखलाहट?
चिट्ठी के पहले ही अध्याय में लगाए गए आरोपों की जड़ें हालिया प्रशासनिक कार्रवाइयों में छिपी हो सकती हैं। शाजापुर में लंबे समय से जमे भूमाफियाओं पर विधायक की पहल पर जो शिकंजा कसा गया है, उसने कई बड़े सिंडिकेट्स की नींद उड़ा दी है।
लगभग 50 लोगों को जारी किए गए नोटिस इस बात का प्रमाण हैं कि सत्ता अब ‘मैनेजमेंट’ से नहीं, बल्कि ‘नियम’ से चल रही है। संभवतः यही ‘सख्ती’ इस गुमनाम विरोध का असली कारण है।
विधायक के कार्यकाल में मिला पहला मेडिकल कॉलेज: स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांति

विपक्ष अक्सर डॉक्टरों से मिलीभगत का आरोप लगाता है, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि भीमावद के प्रयासों से मिला मेडिकल कॉलेज और ट्रॉमा सेंटर शाजापुर के लिए ‘गेम चेंजर’ साबित हुए हैं।
सरकारी अस्पतालों से होने वाले रेफरल केसों में आई कमी और औचक निरीक्षणों के बाद सुधरी व्यवस्थाएं इस बात की तस्दीक करती हैं कि विधायक का दखल व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि जन-सुविधा के लिए है। अस्पताल में पूछताछ कक्ष की तत्काल स्थापना एक सक्रिय जन-प्रतिनिधि की कार्यशैली को दर्शाती है।
नगर में बिछाया सड़कों का जाल, त्वरित हो रही सुनवाई
ठेकेदारों को संरक्षण देने के आरोपों के बीच वास्तविकता यह है कि गुणवत्ता खराब होने पर विधायक ने खुद सड़कों को दोबारा बनवाया है। फोरलेन, नया बायपास और मक्सी का औद्योगिक हब बनना यह दर्शाता है कि कमीशन की राजनीति के बजाय यहाँ ‘विज़न की राजनीति’ हावी है।
यदि संरक्षण होता, तो खराब गुणवत्ता पर कार्रवाई के बजाय उसे दबा दिया जाता।
मंदिरों का जीर्णाेद्धार, सनातन को मजबूत किया
धर्म के व्यवसायीकरण का आरोप लगाने वालों के पास शायद इस बात का जवाब नहीं है कि वर्षों से उपेक्षित पड़े मंदिरों और डोल ग्यारस के पारंपरिक अखाड़ों को नया जीवन कैसे मिला। भीमावद ने इसे केवल राजनीति नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पुनरुत्थान के रूप में लिया, जिसे जनता का व्यापक समर्थन प्राप्त है।
संघ, सत्ता और संगठन का भरोसा
राजनीतिक गलियारों में यह स्पष्ट है कि जो नेता संगठन, संघ और जनता—तीनों मोर्चों पर सफल होता है, उसी पर पार्टी बार-बार दांव लगाती है। अरूण भीमावद को तीसरी बार टिकट मिलना और भारी मतों से जीतना उनके प्रति अटूट विश्वास का प्रतीक है। भाषा शैली और आरोपों के स्तर को देखते हुए यह साफ़ है कि यह ‘चिट्ठी कांड’ केवल एक संगठित दुष्प्रचार का हिस्सा है।
जनमत: क्या कहती है शाजापुर की जनता?
क्षेत्र के व्यापारियों और आम नागरिकों से बातचीत में विधायक के प्रति एक ‘सकारात्मक साख’ उभर कर सामने आती है।
मेडिकल जगत के विपुल चौहान स्वास्थ्य सेवाओं में आए सुधार को विधायक की उपलब्धि मानते हैं।
कालोनाईजर महेश भावसार और होटल व्यवसायी हेमराज भावसार इस बात की पुष्टि करते हैं कि विधायक का जोर हमेशा ‘नियम और नैतिकता’ पर रहता है।
मंडी व्यवसायी सुभाष जैन के अनुसार, विधायक के परिवार का भी व्यापार में सामान्य व्यवहार रखना यह दर्शाता है कि सत्ता का अहंकार इस परिवार को छू भी नहीं गया है।
विधायक का कहना
“शाजापुर में पिछले ढाई दशकों का सूखा खत्म कर मैंने विकास की गंगा बहाने का प्रयास किया है। जो लोग मेरी छवि धूमिल करने की कोशिश कर रहे हैं, वे दरअसल विकास विरोधी हैं। जनता की अदालत में मेरा काम बोलता है और ऐसी आधारहीन चिट्ठियों से मेरी जनसेवा का संकल्प कमजोर नहीं होगा।”
— अरूण भीमावद, विधायक-शाजापुर
- अंतत: शाजापुर की राजनीति का यह ‘चिट्ठी कांड’ तथ्यों के अभाव में कमजोर पड़ता दिख रहा है। जनता के बीच विधायक की छवि एक ‘विकास पुरुष’ के रूप में मजबूत है, और इस तरह के हमले उनकी राजनीतिक जमीन को कमजोर करने के बजाय, सहानुभूति और समर्थन को और बढ़ा सकते हैं।
