धार, अग्निपथ। 4 फरवरी 2026 को धार जिले के वन विभाग ने एक ऐतिहासिक नवाचार करते हुए प्रदेश का पहला ‘ड्रोन स्क्वायड’ गठित किया है। अब जिले के विशाल वन क्षेत्रों की निगरानी जमीन के साथ-साथ आसमान से भी की जाएगी। इस आधुनिक पहल से जंगलों में होने वाले अतिक्रमण, आगजनी की घटनाओं, वन्यजीवों की गतिविधियों और विभागीय कार्रवाइयों पर अधिक प्रभावी ढंग से नियंत्रण रखा जा सकेगा। यह तकनीक धार जिले के लिए सुरक्षा की दृष्टि से एक नई मिसाल बनकर उभरी है।
वन विभाग द्वारा गठित इस विशेष ड्रोन स्क्वायड में चार कर्मचारियों की टीम बनाई गई है, जिन्हें इंदौर में ड्रोन संचालन और निगरानी का सघन प्रशिक्षण दिया गया है। इस टीम में एक डिप्टी रेंजर, दो वन रक्षक और एक ऑपरेटर को नियुक्त किया गया है। यह टीम जिले के विभिन्न क्षेत्रों में पहुंचकर ड्रोन के माध्यम से नियमित मॉनिटरिंग करेगी और हर संदिग्ध गतिविधि पर पैनी नजर रखेगी।
एक लाख हेक्टेयर से अधिक वन क्षेत्र की होगी सुरक्षा
उल्लेखनीय है कि धार जिले में करीब सवा लाख हेक्टेयर वन क्षेत्र है, जो सात रेंज में विभाजित है। जिले में सर्वाधिक वन क्षेत्र टांडा, कुक्षी और सरदारपुर में हैं, जबकि धामनोद व बाग में भी वन भूमि का विस्तार है। अधिकांश जंगल लंबे समय से अतिक्रमण के साए में रहे हैं, ऐसे में ड्रोन स्क्वायड की शुरुआत से निगरानी तंत्र मजबूत होगा। जिन क्षेत्रों में आग लगने की घटनाएं अधिक होती हैं, वहां ड्रोन के जरिए तुरंत स्थिति का आकलन कर यह स्पष्ट किया जा सकेगा कि आग कितने क्षेत्र में फैली है और उसे बुझाने के लिए कितने संसाधनों की आवश्यकता होगी।
अतिक्रमण और अवैध गतिविधियों पर लगेगा अंकुश
ड्रोन स्क्वायड का सबसे बड़ा लाभ वन भूमि पर हो रहे अतिक्रमण को रोकने में मिलेगा। विभाग ड्रोन से जंगलों के फोटो और वीडियो कैप्चर करेगा, जिनकी पुराने रिकॉर्ड से तुलना कर अवैध कब्जों पर समय रहते कार्रवाई की जा सकेगी। इससे अतिक्रमणकारियों में भय व्याप्त होगा। साथ ही, अतिक्रमण हटाने या किसी भी विभागीय कार्रवाई के दौरान होने वाले विवादों की रिकॉर्डिंग ड्रोन कैमरे में होगी, जिससे कर्मचारियों की सुरक्षा बढ़ेगी और साक्ष्य के रूप में वीडियो उपलब्ध रहेंगे।
वन्यजीवों की गतिविधियों पर रहेगी नजर
वन्यप्राणियों की सुरक्षा और निगरानी में भी ड्रोन अहम भूमिका निभाएगा। तेंदुए या अन्य हिंसक वन्यजीवों की मौजूदगी की सूचना मिलने पर ड्रोन के माध्यम से उनके सटीक मूवमेंट का पता लगाया जा सकेगा। इससे ग्रामीण इलाकों में फैलने वाले डर को कम करने और समय पर सतर्कता बरतने में मदद मिलेगी।
“विभाग ने दो अत्याधुनिक ड्रोन खरीदे हैं और इसके लिए अलग से ड्रोन स्क्वायड गठित किया गया है। यह प्रदेश में अपनी तरह का पहला प्रयोग है, जिससे जंगलों की सुरक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी।” — विजयानंतम टीआर, डीएफओ धार
