आगर मालवा, अग्निपथ। उज्जैन-झालावाड़ मार्ग पर अन्य राज्य की नंबर प्लेट देखते ही पुलिस की रोक-टोक से श्रद्धालुओं में भारी आक्रोश है। महाकाल की नगरी उज्जैन जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह रास्ता अब आस्था का नहीं, बल्कि अपमान का इम्तिहान बनता जा रहा है। राजस्थान के झालावाड़ से उज्जैन जाने वाले मुख्य मार्ग पर प्रतिदिन की जा रही चेकिंग में अन्य राज्यों के वाहनों को विशेष रूप से निशाना बनाए जाने के गंभीर आरोप सामने आए हैं।
श्रद्धालुओं का सीधा आरोप है कि स्थानीय नंबर प्लेट वाली गाड़ियों को पुलिस बिना रोके जाने देती है, जबकि दूसरे राज्यों की नंबर प्लेट देखते ही पुलिस सक्रिय हो जाती है। चेकिंग के नाम पर श्रद्धालुओं के वाहनों को आधे से एक घंटे तक अनावश्यक रूप से रोका जा रहा है। इससे भगवान महाकाल के दर्शन के लिए निकले भक्तों में यह सवाल उठ रहा है कि क्या अब दर्शन के लिए भी राज्य की पहचान मायने रखने लगी है?
इस मनमानी रोक-टोक के कारण कई श्रद्धालुओं की भस्म आरती छूट रही है। सड़क पर घंटों खड़े रहने के कारण बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनकी आस्था की यात्रा मानसिक तनाव में बदल रही है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यातायात पुलिस किस कानून के तहत नंबर प्लेट देखकर चयनात्मक कार्रवाई कर रही है? यदि सुरक्षा जांच अनिवार्य है, तो सभी वाहनों की समान जांच क्यों नहीं की जा रही?
श्रद्धालुओं का कहना है कि पुलिस का यह व्यवहार भेदभावपूर्ण और आस्था पर प्रहार है। प्रशासन की चुप्पी भी अब कटघरे में है। यदि यह सब वरिष्ठ अधिकारियों की जानकारी में है, तो यह गंभीर लापरवाही है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस भेदभावपूर्ण व्यवस्था पर कब लगाम लगाता है, ताकि महाकाल दर्शन की राह सुगम हो सके।
