लालघाटी पुलिस ने 24 घंटे में उखाड़ फेंकी अंधे कत्ल की परतें, दो आरोपी गिरफ्तार
शाजापुर, अग्निपथ। इश्क, रंजिश और इंतकाम…। शाजापुर के लालघाटी क्षेत्र में हुई एक सनसनीखेज वारदात की स्क्रिप्ट इन्हीं तीन शब्दों के इर्द-गिर्द लिखी गई। जिसे लोग अब तक एक सड़क हादसा मान रहे थे, वह दरअसल एक सोची-समझी कोल्ड ब्लडेड मर्डर की साजिश थी। कातिलों ने कानून की आंखों में धूल झोंकने के लिए लाश को बाइक समेत पुलिया के नीचे फेंक दिया था, लेकिन लालघाटी पुलिस की बाज जैसी नजरों से वे बच नहीं सके और पुलिस ने महज 24 घंटे में इस अंधे कत्ल का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया।
दृश्य जो रूह कंपा दे
4 फरवरी की सुबह… राघवेल के पास लखुंदर नदी की पुलिया। नीचे एक लाश पड़ी थी, पास में मोटरसाइकिल और चारों तरफ खून। मृतक की पहचान राजेश मालवीय के रूप में हुई। पहली नजर में लगा कि शायद कोई हादसा हुआ है, लेकिन मृतक के भाई सोनू और पुलिस को दाल में कुछ काला लगा। जब फॉरेंसिक टीम ने शव के जख्म देखे, तो चीख-चीख कर गवाही मिल यह हादसा नहीं, हत्या है!
कातिल तक ऐसे पहुंची पुलिस
एसपी यशपाल सिंह राजपूत के एक्शन प्लान और टीआई अर्जुन सिंह मुजाल्दे की अगुवाई में पुलिस ने जब तकनीकी जाल बिछाया, तो सुरागों की कडि़यां जुड़ती गईं। सीसीटीवी फुटेज और सायबर सेल के इनपुट ने इशारा किया ग्राम टुंगनी की ओर। पुलिस ने घेराबंदी कर रविन्द्र मालवीय और राहुल मालवीय को दबोच लिया। थाने की चारदीवारी में जब पुलिसिया पूछताछ हुई, तो आरोपियों के तोते उड़ गए और उन्होंने जो कहानी बताई, वह हैरान करने वाली थी।
बदले की आग, वह मेरी पत्नी को गुजरात ले गया था
मुख्य आरोपी रविन्द्र के सिर पर खून सवार था। उसने कबूला कि मृतक राजेश उसकी पत्नी आरती पर बुरी नजर रखता था और उसे परेशान करता था। हद तो तब हो गई जब वह उसे मजदूरी के बहाने गुजरात अपने साथ ले गया। पत्नी के चरित्र पर उठे सवालों और समाज में बदनामी के डर ने रविन्द्र को हत्यारा बना दिया।
मौत का वो खौफनाक मंजर,
3 फरवरी की रात राहुल के फोन से राजेश को मिलने के बहाने टुंगनी बुलाया गया। आरोपी उसे मानसिंह पटेल के गेहूं के खेत में ले गए। वहां पहले लाठी और चाकुओं से उसे बेरहमी से पीटा गया। जब वह अधमरा हो गया, तो गला घोंटकर उसकी सांसें छीन ली गईं। हत्या के बाद लाश को ठिकाने लगाने के लिए उसे मोटरसाइकिल के साथ बांधा और लखुंदर नदी की पुलिया से नीचे फेंक दिया, ताकि यह महज एक एक्सीडेंट लगे।
साक्ष्य मिटाने की इतनी शातिर कोशिश के बावजूद पुलिस ने आरोपियों को कानून के शिकंजे में ले लिया। इस शानदार खुलासे में टीआई अर्जुन सिंह मुजाल्दे, एसआई अंकित इटावदिया, और उनकी पूरी जांबाज टीम सउनि भोपाल सिंह, प्र.आर. जसवंत, विकास तिवारी, सायबर टीम आदि की भूमिका सराहनीय रही।
