कुबेरेश्वर धाम में ‘ग्रीन शिवरात्रि’ का शंखनाद: पंडित प्रदीप मिश्रा के आह्वान पर देश भर में रोपे गए एक करोड़ पौधे

सीहोर, अग्निपथ। जिला मुख्यालय स्थित कुबेरेश्वर धाम में आयोजित सात दिवसीय रुद्राक्ष महोत्सव के दूसरे दिन आस्था, राष्ट्रवाद और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा त्रिवेणी संगम देखने को मिला। अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर ‘ग्रीन शिवरात्रि’ का संदेश देते हुए मंदिर परिसर में रुद्राक्ष से निर्मित भव्य शिवलिंग का पूजन किया। इसके पश्चात उन्होंने बेलपत्र के पौधों का रोपण कर प्रकृति सेवा का आह्वान किया। महाराज श्री के इस आह्वान पर रविवार को राजस्थान, महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब और बिहार सहित विभिन्न राज्यों में उनके अनुयायियों द्वारा करीब एक करोड़ से अधिक पौधों का रोपण किया गया।

“मुफ्त ऑक्सीजन के लिए पौधों का संरक्षण जरूरी”

कथा के दौरान पंडित प्रदीप मिश्रा ने पर्यावरण संतुलन पर जोर देते हुए कहा कि मानव जीवन तभी स्वस्थ होगा जब हम कदम-कदम पर पेड़ लगाएंगे। उन्होंने कहा कि पेड़-पौधे हमें मुफ्त में ऑक्सीजन देते हैं, जिसे नजरअंदाज करना मानव अस्तित्व पर संकट खड़ा कर सकता है। भगवान शिव का संदेश भी प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर चलने का है। इसी कड़ी में महोत्सव में आए भक्तों के लिए विठलेश सेवा समिति द्वारा व्यापक इंतजाम किए गए। रविवार को श्रद्धालुओं के लिए 80 क्विंटल फलाहारी खिचड़ी, 50 क्विंटल छाछ, 30 क्विंटल मिक्चर और 25 क्विंटल साबूदाने की खीर का वितरण किया गया।

पद्म पुरस्कार देने की उठी मांग, नामचीन हस्तियां रहीं मौजूद

कथा के दूसरे दिन मंच पर कई प्रतिष्ठित विभूतियाँ उपस्थित रहीं। जल संरक्षण विशेषज्ञ पद्मश्री डॉ. उमाशंकर पाण्डेय ने पंडित प्रदीप मिश्रा के सामाजिक योगदान की तुलना राष्ट्र-ऋषि नानाजी देशमुख से की। उन्होंने सरकार से मांग की कि निस्वार्थ भाव से जल और प्रकृति संरक्षण का अलख जगाने वाले पंडित मिश्रा को ‘पदम पुरस्कार’ से सम्मानित किया जाना चाहिए। कार्यक्रम में पर्यावरण गतिविधि के राष्ट्रीय संयोजक गोपाल आर्या और पतंजलि ग्रामोद्योग न्यास के महामंत्री डॉ. यशदेव शास्त्री ने भी महाराज के सामाजिक समर्पण की सराहना की।

आध्यात्मिक संदेश: “शिव तो आपकी श्वासों में हैं”

शिव महापुराण की व्याख्या करते हुए महाराज श्री ने कहा कि महादेव को ढूंढने कहीं बाहर जाने की जरूरत नहीं है, वे ‘आत्मलिंग’ के रूप में हमारी श्वासों में ही विराजमान हैं। उन्होंने कहा कि महादेव अपने भक्त को वैभव देने से पहले सहनशीलता देते हैं। पंडित जी ने संस्कारों पर जोर देते हुए कहा कि जिस घर के बच्चे मंदिर की सीढ़ी चढ़ते हैं, उस घर के बुजुर्गों को कभी वृद्धाश्रम की सीढ़ी नहीं चढ़नी पड़ती। उन्होंने प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत के संकल्प का समर्थन करते हुए भक्तों से स्वदेशी अपनाने की भी अपील की।

5 लाख श्रद्धालुओं ने किया शिव महापुराण का श्रवण

कुबेरेश्वर धाम में रविवार को 5 लाख से अधिक श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ा। चार विशाल पंडालों के साथ-साथ श्रद्धालु खुले मैदानों में भी बैठकर कथा सुनते नजर आए। जो भक्त मुख्य मंच को सीधे नहीं देख पा रहे थे, उनके लिए बड़ी एलईडी स्क्रीन लगाई गई थीं। विठलेश सेवा समिति के सदस्य समीर शुक्ला, विनय मिश्रा, आशीष वर्मा और अन्य सहयोगियों ने व्यवस्थाओं को संभाला। कथा का समापन ‘तेरा शुक्रिया है’ भजन और भव्य महाआरती के साथ हुआ, जिसमें देश के कई नामचीन मीडिया संस्थानों के प्रमुख और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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