उज्जैन, अग्निपथ। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर दीप प्रज्जवलित कर और फीता काटकर ‘विक्रम व्यापार मेला 2026’ का भव्य शुभारंभ किया। बाबा महाकाल की नगरी में आयोजित यह मेला न केवल सांस्कृतिक बल्कि आर्थिक विकास के नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। मुख्यमंत्री ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बताया कि इस वर्ष नगर निगम को अभी तक 4 करोड़ 10 लाख रुपये की आय प्राप्त हो चुकी है, जो पिछले वर्षों की तुलना में एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य की यह नगरी अब व्यापारिक राजधानी के रूप में अपनी नई पहचान बना रही है।
वाहन खरीदी पर भारी छूट और रिकॉर्ड स्टॉल्स
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आंकड़ों के जरिए विक्रम व्यापार मेला की सफलता को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में जहां 122 करोड़ रुपये की कर छूट दी गई थी, वहीं 2025 में यह आंकड़ा 187 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था। इस वर्ष भी वाहनों के रोड टैक्स में 50 प्रतिशत की भारी छूट दी जा रही है, जिससे आम जनता में भारी उत्साह है। मेले के स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि इस बार फोर व्हीलर के 139 और टू व्हीलर के 36 स्टॉल्स लगाए गए हैं। इनके अलावा कार डेकोरेशन, सांची, विभिन्न बैंक और अन्य उत्पादों के स्टॉल्स भी आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
विक्रम व्यापार मेला: रोजगार के नए अवसर और उज्जैन मॉडल
विक्रम व्यापार मेला के माध्यम से उज्जैन में रोजगार के नए द्वार खुल रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल वाहन ही नहीं, बल्कि कपड़े, मनिहारी और प्रसिद्ध मालवी व्यंजनों की दुकानों के लगने से स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को बल मिला है। उज्जैन का यह विकास मॉडल अब पूरे प्रदेश के लिए एक मिसाल बन रहा है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि आने वाले सिंहस्थ 2028 को भी इसी भव्यता और समर्पण के साथ आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने वाहन खरीदने वाले नागरिकों को सांकेतिक रूप से चाबियां भी सौंपी।
विक्रम व्यापार मेला के शुभारंभ कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने भी सहभागिता की। मंच पर सांसद अनिल फिरोजिया, महापौर मुकेश टटवाल, नगर निगम सभापति कलावती यादव और विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा सहित अन्य गणमान्य प्रतिनिधि उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने महाशिवरात्रि पर श्रद्धालुओं को सुगमता से हो रहे बाबा महाकाल के दर्शनों पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह बाबा का ही आशीर्वाद है कि उज्जैन धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी के साथ-साथ अब एक सुदृढ़ व्यापारिक नगरी के रूप में भी देश में अपनी पहचान बना रहा है।
