उज्जैन, अग्निपथ। शहर में इन दिनों बच्चा चोर गिरोह के सक्रिय होने की अफवाहें तेजी से पांव पसार रही हैं, जिसके चलते आम जनता में दहशत का माहौल है। इस खौफ का नतीजा यह हो रहा है कि लोग राह चलते संदिग्धों, विक्षिप्तों और यहां तक कि कर्मचारियों को भी बच्चा चोर समझकर निशाना बना रहे हैं। पिछले दो-तीन दिनों में शहर के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं, जहां भीड़ ने बेगुनाहों को पकड़कर पुलिस के हवाले किया या उनके साथ मारपीट की।
विक्षिप्त महिला को भीड़ ने घेरा
रविवार दोपहर नीलगंगा थाना क्षेत्र के अंतर्गत धन्नालाल की चाल में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब लोगों ने एक महिला को संदिग्ध अवस्था में घूमते देखा। बच्चा चोरी की आशंका में भीड़ ने उसे पकड़ लिया और पुलिस को बुला लिया। थाना प्रभारी (TI) तरुण कुरील ने बताया कि जब महिला को थाने लाकर पूछताछ की गई, तो पता चला कि वह अर्धविक्षिप्त है और चामुंडा माता मंदिर के पास रहकर भिक्षावृत्ति करती है। पुलिस ने तस्दीक करने के बाद उसे छोड़ दिया।
सुरक्षा गार्ड को समझ लिया बच्चा चोर
ऐसी ही एक घटना शनिवार को महाकाल सिंधी कॉलोनी की बस्ती में हुई। यहां वर्दी पहने एक निजी कंपनी के सुरक्षा गार्ड को महिलाओं ने घेर लिया। महिलाओं का आरोप था कि वह बच्चों की संख्या के बारे में पूछताछ कर रहा था। घबराकर जब गार्ड भागने लगा, तो भीड़ ने उसे सांवर रोड स्थित एक बैंक के पास पकड़ लिया। पुलिस जांच में सामने आया कि युवक मनोरोगी है और वास्तव में एक कंपनी में गार्ड की नौकरी करता है। उसका आईडी कार्ड चेक करने के बाद पुलिस ने उसे रिहा किया।
ढाबा कर्मचारी की बेरहमी से पिटाई
अफवाहों का सबसे हिंसक रूप इंदौर रोड पर तीन दिन पहले देखने को मिला। यहां मेघदूत ढाबे के एक कर्मचारी को लोगों ने बच्चा चोर समझ लिया। बिना सच्चाई जाने भीड़ ने उसकी जमकर पिटाई कर दी। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अब तक शहर में बच्चा चोरी की किसी भी घटना की पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस प्रशासन ने जनता से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर चल रही भ्रामक खबरों पर विश्वास न करें और किसी भी संदिग्ध की सूचना सीधे पुलिस को दें, कानून अपने हाथ में न लें।
