भोजशाला विवाद: हाई कोर्ट में सुनवाई टली, अब 18 फरवरी को होगी अगली बहस

धार, अग्निपथ। धार की ऐतिहासिक और बहुचर्चित भोजशाला को लेकर चल रहा कानूनी विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। सोमवार को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच में इस संवेदनशील मामले पर महत्वपूर्ण सुनवाई होनी थी, लेकिन वकीलों की हड़ताल के चलते बहस पूरी नहीं हो सकी। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने अब इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 18 फरवरी की तारीख तय की है। हिंदू पक्ष के याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने पुष्टि की कि हड़ताल के कारण कार्यवाही को आगे बढ़ाना पड़ा।

एएसआई सर्वे पर मुस्लिम पक्ष ने उठाए सवाल

मामले में नया मोड़ तब आया जब मुस्लिम पक्ष ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा की गई वैज्ञानिक जांच पर गंभीर आरोप लगाए। मुस्लिम पक्ष का दावा है कि वर्ष 2024 में किया गया सर्वे निष्पक्ष नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि रात के अंधेरे में कुछ पत्थर और अवशेष परिसर के भीतर लाकर रखे गए, जिन्हें बाद में सर्वे रिपोर्ट का हिस्सा बना दिया गया। उनका कहना है कि वे वर्ष 2003 से अपनी आपत्तियां दर्ज करा रहे हैं और अदालत को पहले उन पुराने बिंदुओं पर सुनवाई करनी चाहिए।

हिंदू पक्ष को वैज्ञानिक रिपोर्ट पर भरोसा

दूसरी ओर, हिंदू पक्ष ने एएसआई की जांच रिपोर्ट को पूरी तरह सटीक और वैज्ञानिक बताया है। उनका तर्क है कि 15 जुलाई 2024 को हाई कोर्ट में पेश की गई विस्तृत रिपोर्ट गहन परीक्षण पर आधारित है और इससे भोजशाला की वास्तविक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी। हिंदू पक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि मुस्लिम पक्ष द्वारा तकनीकी आपत्तियां उठाकर मामले को जानबूझकर लंबा खींचने का प्रयास किया जा रहा है।

सदियों पुराना है आस्था और अधिकार का विवाद

धार स्थित भोजशाला का विवाद दशकों पुराना है। हिंदू समाज इसे विद्या की देवी मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला की मस्जिद बताता है। फिलहाल लागू व्यवस्था के अनुसार, यहाँ मंगलवार को हिंदुओं को पूजा करने और शुक्रवार को मुस्लिमों को नमाज अदा करने की अनुमति दी गई है। अब आगामी 18 फरवरी की तारीख इस मामले में बेहद निर्णायक मानी जा रही है।

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