उज्जैन, अग्निपथ। शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने और सुचारू यातायात के लिए विभाग द्वारा लाखों रुपये खर्च कर विभिन्न चौराहों पर प्रीपेड बूथ और चौकियां स्थापित की गई थीं। उद्देश्य था कि इन बूथों पर यातायात जवान तैनात रहकर व्यवस्था संभालेंगे, लेकिन वर्तमान में देखरेख के अभाव में ये बूथ लावारिस हालत में पड़े हैं और इनका शर्मनाक तरीके से दुरुपयोग हो रहा है।
स्मार्ट सिटी की सुंदरता पर लापरवाही का दाग
एक ओर स्मार्ट सिटी योजना के तहत शहर को संवारने में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है, वहीं दूसरी ओर विभाग की अनदेखी से सरकारी संपत्तियां बर्बाद हो रही हैं। देवास गेट क्षेत्र में रखे यातायात बूथ की स्थिति यह है कि वहां अब एक कटिंग (सैलून) की दुकान संचालित हो रही है। इससे भी बुरा हाल माधव नगर रेलवे स्टेशन परिसर के बाहर रखे प्रीपेड बूथ का है, जिसे लोगों ने पेशाबघर में तब्दील कर दिया है। बूथ के अंदर इस कदर गंदगी और दुर्गंध है कि वहां से गुजरना भी दूभर हो गया है।
जवानों की कमी से व्यवस्था ध्वस्त
ट्रैफिक विभाग के सूत्रों का कहना है कि विभाग में जवानों की भारी कमी है, जिसके चलते कई बूथों पर अभी भी ताले लटके हुए हैं। शहर का क्षेत्रफल बढ़ गया है और महाकाल लोक बनने के बाद से सभी मार्गों पर यातायात का दबाव कई गुना बढ़ा है। जवानों की पर्याप्त संख्या न होने के कारण न केवल ये बूथ लावारिस पड़े हैं, बल्कि शहर के मुख्य चौराहों पर भी जाम की स्थिति निर्मित हो रही है।
सिग्नल और बूथ बने शोपीस
यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए लगाए गए सिग्नल और प्रीपेड बूथ अब महज शोपीस बनकर रह गए हैं। अधिकारियों का ध्यान न होने से अराजक तत्व इन संपत्तियों का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि प्रशासन इन लावारिस बूथों को या तो सुचारू रूप से संचालित करे या इन्हें वहां से हटाया जाए ताकि शहर की सुंदरता बरकरार रहे और गंदगी न फैले।
