धार, अग्निपथ। जिले में गेहूं की कटाई के सीजन को देखते हुए प्रशासन ने नरवाई जलाने पर प्रतिबंध लगा दिया है। अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारी संजीव केशव पाण्डेय ने जनसामान्य के हित, सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163(2) के अंतर्गत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए हैं। यह आदेश 17 फरवरी से 17 अप्रैल 2026 तक संपूर्ण धार जिले की राजस्व सीमा में प्रभावी रहेगा।
हार्वेस्टर के साथ स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम अनिवार्य; बिना मशीनरी के संचालन पर रोक
प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, फसलों की कटाई में उपयोग किए जाने वाले प्रत्येक कंबाइन हार्वेस्टर के साथ स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम (SMS) या स्ट्रा रीपर में से किसी एक मशीन का होना अनिवार्य है। यदि कोई हार्वेस्टर बिना इन सुरक्षा प्रणालियों के संचालित पाया जाता है, तो संबंधित मालिक के विरुद्ध वैधानिक कार्यवाही की जाएगी। जिला परिवहन अधिकारी और कृषि अभियांत्रिकी विभाग को इस व्यवस्था की निरंतर निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।
नरवाई जलाने पर प्रतिबंध का पालन नहीं तो लगेगा 15000 रुपये तक का जुर्माना
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के निर्देशों के पालन में नरवाई (फसल अवशेष) जलाने पर पर्यावरण क्षति पूर्ति अर्थदण्ड निर्धारित किया गया है। दो एकड़ से कम भूमि वाले किसानों पर 2500 रुपये, दो से पांच एकड़ तक की भूमि पर 5000 रुपये और पांच एकड़ से अधिक भूमि होने पर प्रति घटना 15000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। आदेश के उल्लंघन की स्थिति में भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 223 के तहत दण्डात्मक कार्यवाही भी सुनिश्चित की जाएगी।
भूमि की उर्वरता और पर्यावरण बचाने की अपील
अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारी धार, ने किसानों से अपील की है कि वे नरवाई जलाने पर प्रतिबंध का पालन कर फसल अवशेषों को जलाने के बजाय उनका उपयोग मल्चिंग, पशु आहार या भूसा निर्माण में करें। नरवाई जलाने से मिट्टी के लाभदायक सूक्ष्म जीव और जैविक कार्बन नष्ट हो जाते हैं, जिससे भूमि की उपजाऊ शक्ति कम होती है। प्रशासन ने किसानों को हैप्पी सीडर, सुपर सीडर और बेलर जैसी आधुनिक मशीनों के उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया है, ताकि पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए बिना अगली फसल की बोनी की जा सके। नरवाई जलाने पर प्रतिबंध पर्यावरण के साथ किसानों के भी हित में है।
