उज्जैन, अग्निपथ। उज्जैन के नागझिरी औद्योगिक क्षेत्र स्थित ओमकार केमिकल कंपनी में काम करने वाले दो दर्जन से अधिक कर्मचारियों ने कंपनी प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि केमिकल फैक्ट्री में काम करने के दौरान उनकी सुनने की क्षमता 90 प्रतिशत तक खत्म हो चुकी है। शहर के मध्य संचालित होने वाली इस कंपनी के पीड़ित कर्मचारियों ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री (सीएम) से लेकर उज्जैन कलेक्टर रोशन सिंह तक से की है।
कलेक्टर रोशन सिंह ने मामले की गंभीरता को देखते हुए बताया कि कंपनी के खिलाफ एक आवेदन प्राप्त हुआ है, जिसकी जांच की जा रही है। जांच प्रतिवेदन प्राप्त होते ही दोषियों पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
बिना मशीन के नहीं सुन पाते, दूसरी कंपनी में भी नौकरी का संकट
हालात यह हैं कि करीब 30 कर्मचारी अब बिना हियरिंग मशीन के कुछ भी सुन पाने में असमर्थ हैं। सभी लोग मशीन लगाकर ही आपस में बात कर पाते हैं। बहरेपन का शिकार हुए इन कर्मचारियों के सामने अब रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है, क्योंकि इस शारीरिक अक्षमता के कारण उन्हें दूसरी किसी कंपनी में काम भी नहीं मिल रहा है। हैरानी की बात यह है कि बहरेपन का शिकार हुए इन 30 से अधिक कर्मचारियों की उम्र महज 20 से 30 साल के बीच है।
लाखनसिंह बोले- 6 माह में ही कान डैमेज हुए, नौकरी छोड़ी
बरखेड़ी बाजार निवासी लखन चौहान वर्ष 2022 में 15500 रुपये मासिक वेतन पर कंपनी में लेबर के तौर पर भर्ती हुए थे। लखन के अनुसार, काम शुरू करने के 6 माह के अंदर ही उनके कान में सीटी बजना शुरू हुई। जब उन्होंने डॉक्टरों को दिखाया और जांच करवाई, तो इंदौर के एमवाई अस्पताल की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि उनके दोनों कान पूरी तरह से डैमेज हो चुके हैं। इसके बाद उन्हें मजबूरन नौकरी छोड़नी पड़ी।
कान इतने खराब हुए कि दिव्यांगता का सर्टिफिकेट बन गया
लखन चौहान ने बताया कि ओमकार केमिकल में लेबर का काम करने के दौरान कई बार केमिकल शरीर पर भी गिरता था। इसी केमिकल के प्रभाव के कारण उनके दोनों कान खराब हो गए। इंदौर और उज्जैन में लंबा इलाज कराने के बाद भी कोई सुधार नहीं हुआ। अब स्थिति यह है कि लखन सहित आधा दर्जन कर्मचारियों का दिव्यांगता प्रमाण पत्र (विकलांग सर्टिफिकेट) बन चुका है। पीड़ितों ने न्याय के लिए कलेक्टर से गुहार लगाई है।
तीन माह में ही 80 प्रतिशत कान खराब
मीनगांव निवासी राजेश परमार ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2021 में ओमकार केमिकल में काम करना शुरू किया था। उस समय उन्हें 10500 रुपये सैलरी मिलती थी। नौकरी के मात्र तीन महीने बाद ही उनके कानों में सीटी बजने और भारीपन की समस्या शुरू हो गई। डॉक्टर से जांच कराने पर पता चला कि उनके एक कान में 80 और दूसरे में 90 प्रतिशत डैमेज हो चुका है। अब दूसरी कंपनियां उन्हें काम पर नहीं रख रही हैं और न ही ओमकार केमिकल कंपनी ने कोई मुआवजा दिया है।
कंपनी का दावा- कई कर्मचारी वर्षों से सुरक्षित
दूसरी ओर, ओमकार केमिकल कंपनी के मैनेजर एम मोहन ने इन आरोपों को नकारा है। उनका कहना है कि जिन कर्मचारियों को दिक्कत हुई थी, हमने उन्हें इलाज कराने के लिए कहा था, लेकिन कोई आगे नहीं आया। मोहन ने दावा किया कि कंपनी पिछले 11 वर्षों से चल रही है और वर्तमान में भी करीब 100 कर्मचारी वहां काम कर रहे हैं। कई लोग सालों से काम कर रहे हैं, लेकिन किसी को कोई समस्या नहीं हुई।
हार्ट केयर के लिए बनती है दवा, चीन से आता है माल
ओमकार केमिकल फैक्ट्री में मुख्य रूप से खून को पतला करने वाली और हृदय रोग (हार्ट केयर) से संबंधित दवाओं के लिए केमिकल तैयार किया जाता है। यहाँ विशेष रूप से ‘डाइकीटोन’ बनाया जाता है। कंपनी में उपयोग होने वाला 70 प्रतिशत रॉ मटेरियल घरेलू बाजार से आता है, जबकि 30 प्रतिशत कच्चा माल चीन से इम्पोर्ट किया जाता है।
