चार की जगह दो माह का वेतन देना पड़ा भारी, केएसएस कंपनी की कार्यप्रणाली को देखते हुए उसके पक्ष में फैसले की संभावना
उज्जैन, अग्निपथ। श्री महाकालेश्वर मंदिर में सुरक्षा का ठेका संभालने वाली एसआईएस कंपनी की रवानगी तय हो गई है। क्योकि उसने 4 महीने का नहीं केवल 2 महीने का वेतन का भुगतान किया था। सोमवार को कलेक्टर द्वारा निर्णय लिया जाकर एसआईएस कंपनी को विदा कर दिया गया है। मंगलवार को सुरक्षा का ठेका केएसएस कंपनी अथवा ईगल कंपनी को देने पर अंतिम विचार किया जा सकता है।
एसआईएस कंपनी को विगत दिनों कलेक्टोरेट कार्यालय की ओर से अंतिम नोटिस जारी हुआ था। जिसमें. कलेक्टर की ओर से कहा गया था कि 1 सप्ताह में सुरक्षाकर्मियों का 4 महीने का वेतन जारी करें अन्यथा कंपनी को ब्लैक लिस्टेड कर दिया जाएगा। 25 मई को जारी इस नोटिस में कंपनी को मंदिर में सही तरह से काम नहीं करने पर लताड़ा भी गया था और यह भी कहा गया था कि उनको पेनल्टी जमा करनी पड़ेगी। क्योंकि उन्होंने टेंडर शर्तों के मुताबिक 1 तारीख को सुरक्षा कर्मियों को वेतन प्रदाय नहीं किया है।
नोटिस के बाद कंपनी के इंदौर स्थित कार्यालय में हडक़ंप मच गया और 3 जून को 2 माह का वेतन सुरक्षाकर्मियों के खाते में डाल दिया था। इसके साथ ही कंपनी द्वारा नोटिस का जवाब देते हुए अपनी गलती को स्वीकार करते हुए माफी भी मांगी गई थी। अभी भी कंपनी के ब्रांच हेड अरविंद सिंह का कहना है कि उनके द्वारा बाकी बचा हुआ वेतन सुरक्षा कर्मियों को डाल दिया गया है। ऐसे में कलेक्टर द्वारा सोमवार को निर्णय लिया जाकर एसआईएस कंपनी की रवानगी तय कर दी है। हालांकि इसे ब्लैक लिस्टेड नहीं किया गया है।
लीक से नहीं हटना पड़ा भारी
एसआईएस कंपनी के ब्रांच हेड अरविंद सिंह अपनी ही दलीलों पर अटके रहे। कलेक्टर द्वारा नोटिस देने के बावजूद सुरक्षा कर्मियों का 4 माह का वेतन नहीं दिया गया। अरविंद सिंह ने शुरू से ही वेतन देने में लेतलाली की। उन्होंने इस संवाददाता को भ्रम में रखने की कोशिश की। बातचीत में उन्होंने बताया कि मंदिर प्रबंध समिति द्वारा उनको सही जानकारी नहीं देकर गलत जानकारी दी गई है। अब आगे का वेतन बिल क्लीयर करने के बाद देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि मार्च का अतिरिक्त वेतन उनके द्वारा दे दिया गया है। मंदिर प्रबंध समिति को 8 दिन पूर्व नोटिस का जवाब दे दिया गया है। उनका 89 लाख रुपए बिल भुगतान का बाकी है। अभी तक उनके उपर लगाई गई पैनल्टी का निराकरण नहीं हो पाया है।
अधिकारियों की पसंद केएसएस
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार सोमवार को केएसएस या ईगल कंपनी को ठेका देने पर विचार चलता रहा। टेंडर शर्तो में आ रही एल-1, एल-2 के चलते इस प्रकार की परेशानी आ रही है। बताया जाता है कि अधिकारियों की पहली पसंद केएसएस सफाई एजेंसी है जोकि महाकालेश्वर मंदिर में अच्छा काम कर रही है और समय पर कर्मचारियों को वेतन दे रही है। वहीं दूसर ी ओर जब टेंडर खुले थे तो ईगल कंपनी दूसरे नंबर पर आई थी। मंगलवार को पूरे मामले का खुलासा हो जाएगा।
इनका कहना है
फाइल कलेक्टर को भेज दी गई थी। मुझे इस बात की जानकारी नहीं है कि एसआईएस कंपनी की रवानगी हो गई है। -मूलचंद जूनवाल, सहायक प्रशासक