कोरोना से हुई मौतों के लिए इंश्योरेंस का कोई प्रावधान नहीं, मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया

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नई दिल्ली। देश में कोरोना वायरस के डेल्टा प्लस वेरिएंट को लेकर चिंता के बीच केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि कोरोना होने वाली मौतों के लिए इंश्योरेंस का कोई प्रावधान नहीं है। सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर केंद्र सरकार ने जानकारी दी कि देश में ऐसी कोई नीति नहीं है, जिसके तहत कोरोना से हुई मौतों पर नेशनल इंश्‍योरेंस कवर मुहैया कराया जाता हो। साथ ही केद्र ने यह भी कहा कि देश में प्राकृतिक आपदाओं के रिस्‍क इंश्‍योरेंस कवरेज के लिए इस महामारी को शामिल करने का भी कोई विचार नहीं किया गया है।

यह हलफनामा केंद्र सरकार के उस हलफनामे के स्‍पष्‍टीकरण में प्रस्तुत किया गया, जिसमें केंद्र सरकार ने स्पष्ट कहा था कि कोविड-19 से मरने वालों के परिवारों को ₹ 4 लाख की अनुग्रह राशि का भुगतान नहीं किया जा सकता है क्योंकि यह राजकोषीय सामर्थ्य से परे है और केंद्र और राज्य सरकारें गंभीर वित्तीय तनाव में हैं।

दरअसल, 21 जून को सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र से सवाल किया कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नीत राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने कोविड-19 से मरने वाले लोगों के परिवारों को चार-चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि नहीं देने का फैसला किया था। साथ ही, शीर्ष न्यायालय ने कहा कि लाभार्थियों के मन में किसी भी तरह के मलाल को दूर करने के लिए एकसमान मुआवजा योजना तैयार करने पर विचार किया जा सकता है।

केंद्र सरकार ने न्यायालय में दाखिल किये गये अपने हलफनामे में कहा कि राकोषीय वित्तीय स्थिति तथा केंद्र एवं राज्यों की आर्थिक स्थिति पर भारी दबाव के चलते अनुग्रह राशि का वहन बहुत कठिन है। हालांकि केंद्र ने न्यायालय से यह भी कहा कि ऐसा नहीं है कि सरकार के पास धन नहीं है। केंद्र ने कहा था कि हम स्वास्थ्य सेवा ढांचा बनाने, सभी को भोजन सुनिश्चित करने, पूरी आबादी का टीकाकरण करने और अर्थव्यवस्था को वित्तीय प्रोत्साहन पैकेज उपलब्ध कराने के लिए रखे गये कोष के बजाय अन्य चीजों के कोष का उपयोग कर रहे हैं।

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