MP : वन्यजीवों की गणना 1 दिसंबर से, बाघों के लिए नए आशियाने की उम्मीद

धार, अग्निपथ। आबादी एरिया में बढ़ते तेंदुओं की मूवमेंट और इंसानों से संघर्ष की घटनाओं को रोकने के लिए वन विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए प्रदेशभर में 1 दिसंबर से तेंदुओं व बाघों के साथ अन्य वन्यजीवों की गणना होगी। वहीं, धार-झाबुआ जिले में बाघ के नए आशियाने की उम्मीद जग रही है। इसको लेकर डीएफओ ने पिछले दिनों मांडू में कर्मचारियों की बैठक लेकर प्रशिक्षण दिया।

बताया जा रहा है कि इस बार यह गणना टाइगर के फेज फॉर मॉनिटरिंग पैटर्न पर होगी। टाइगर की यूनिक स्ट्राइप लाइन के आधार पर पहचान की जाती है। उसी तरह तेंदुओं के रोजेट यानी धब्बों के आधार पर गणना होगी। यह तेंदुए की यूनिक आईडी होती है। ट्रैप कैमरे से फोटो लेने के बाद इनका मिलान होगा। इसके बाद इनकी संख्या निकाली जाएगी।

यह गणना 1 से 2 माह तक चलेगी। जिले में पहले चरण में धार, मांडू, धामनोद रेंजों में गणना होगी। इस वर्ष यह गणना पूरी तरह से पेपरलेस होगी। गणना में डाटा कलेक्शन किया जाएगा। पहले फेज में वन कर्मचारी मोबाइल एप से गणना करेंगे, उसके बाद वैज्ञानिकों द्वारा इसका परीक्षण किया जाएगा। वहीं, कुछ जगह कैमरे भी लगाए जाएंगे।

चार चरण में होगा कार्य

पहले फेज में आज से शुरू हो रहा है, जिसमें इस बार विभाग नवाचार के रूप में शाकाहारी जीवों की गणना के साथ जंगलों में मिलने वाली अनेक प्रकार की वनस्पति की भी गणना की जाएगी। हर बार मांसाहारी जानवरों की गणना होती है। इसमें वनकर्मी जंगल में मांसाहारी जानवरों जैसे तेंदुए सहित अन्य के मल, पगमार्क, यूरिन को देखकर गणना करेंगे।

यह गणना 1 दिसंबर से शुरू होगी जो 25 जनवरी तक चलेगी। इसमें धार चारों चरण में शामिल है। वहीं, हर चरण में धार जिले की रेंज को इसमें जोड़ा गया है।

18 से 24 दिसंबर तक ट्रांजेक्ट लाइन गणना होगी। इसमें वनकर्मी को जंगल में शाकाहारी जीवों को सीधे देखकर गणना करनी होगी। अखिल भारतीय बाघ गणना आज से शुरू होने वाली है। इसको लेकर डीएफओ ने पहले ही तैयारी कर ली है।

वहीं, एक दिसंबर से यह गणना शुरू होगी जो 25 जनवरी तक चलेगी। गणना को लेकर वन विभाग की टीम ने कर्मचारियों का प्रशिक्षण देना भी शुरू कर दिया है।

चार साल बाद फिर से मैदान पकड़ेंगे कर्मचारी

जिले में चार साल बाद फिर से वन्य प्राणियों का सर्वे किया जा रहा है, जो 1 दिसंबर को जिले में शाकाहारी और मांसाहारी जीवों के प्रत्यक्ष प्रमाणों को देखकर गणना की जाएगी। इसके आधार पर भविष्य की रणनीति तय होगी। 200 से ज्यादा कर्मचारी टीम के साथ 1 लाख हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में पैदल भ्रमण कर गणना करेंगे।

टीम को मांसाहारी जीवों के पदचिन्हों के साथ ही अन्य साक्ष्यों को एकत्रित करने को लेकर प्रशिक्षण दिया गया है। गणना के दौरान ट्रांजिट लाइन तैयार की जाती है, इसके माध्यम से बाघों व तेंदुए के साथ ही अन्य वन्यजीवों की गणना की जाएगी। अखिल भारतीय बाघ गणना हर चार वर्ष में होती है। वर्ष 2022 के बाद होने वाली इस गणना में इस बार बाघों के साथ तेंदुआ, जंगली हाथी, भालू और सहित अन्य वन्य जीव की भी संख्या दर्ज की जाएगी। साल 2022 में जिले में एक भी बाघ सामने नहीं आए थे।

ऐप के माध्यम से जानकारी अपलोड करेंगे

गणना में टीम पैदल जंगल में भ्रमण करेंगी। टीम मौके से साक्ष्यों को जुटाने के साथ ही जानकारी मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से अपलोड की जाएगी। यह डाटा देहरादून वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया को जाएगा। वहां बाघों की गणना की रिपोर्ट जनरेट होती है कि कहां और कितने बाघों की संख्या है।

बाघों की असली तस्वीर जानने की सबसे बड़ी कवायद 1 दिसंबर से शुरू हो रही है। बाघों की गणना के लिए कैमरा ट्रैप लगाए जाएंगे। एविडेंस में मल, पगमार्क, विस्टा समेत अन्य साक्ष्य भी शामिल किए जाएंगे। यह गिनती डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होगी, जिससे बाघ और तेंदुए जैसे वन्यप्राणियों की वास्तविक लोकेशन सुरक्षित रहे। मांडू में कार्यशाला में 60 से अधिक कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें खुद डीएफओ भी मौजूद थे।

यह स्थिति जिले की

  • एक लाख हेक्टेयर जंगल जिले में।
  • एक डीएफओ जिले में।
  • एक एसडीओ दो सब डिवीजन में।
  • सात रेंज में पांच रेंजर के हवाले जिम्मेदारी।
  • 27 सर्कल डिवीजन में।
  • 149 वनरक्षक व कार्यवाहक वनपाल है।
  • 200 कर्मचारी लगेंगे मैदान में।

तैयारियां चल रही हैं

बाघ व अन्य वन्यप्राणी की गणना को लेकर तैयारियां चल रही है। कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जिले में चार चरणों में इसका कार्य चलेगा। इस काम में लगभग 200 से कर्मचारी भाग लेंगे। वहीं हम इस बार जगह तेंदुए ने पशु हानि की जगह पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा। वन्य प्राणी की गणना के लिए हमारी टीम तैयार है। –विजयानंतम टी आर डीएफओ धार

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