RTE: धार जिले में 3999 सीटों के लिए 6274 आवेदन, फिर भी खाली रह गईं 679 सीटें

धार, अग्निपथ। शिक्षा का अधिकार कानून (RTE) के तहत सत्र 2026-27 के लिए जिले के निजी विद्यालयों में प्रवेश की प्रक्रिया का प्रथम चरण संपन्न हो गया है। राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा आयोजित ऑनलाइन लॉटरी के माध्यम से धार जिले के 587 निजी स्कूलों की 3999 आरक्षित सीटों के विरुद्ध 3320 बच्चों को नि:शुल्क प्रवेश के लिए चयनित किया गया है। आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि कुल 6274 आवेदन प्राप्त होने के बावजूद 679 सीटें रिक्त रह गई हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, आवेदन करने वाले विद्यार्थियों में से कई का चयन तकनीकी कारणों या प्राथमिकता के अभाव में नहीं हो सका, जिसके कारण बड़ी संख्या में सीटें अभी भी भरने की प्रतीक्षा में हैं।

सत्यापन प्रक्रिया में लापरवाही से छूटा अवसर

प्रवेश प्रक्रिया के दौरान आवेदन करने वाले 6274 विद्यार्थियों में से केवल 3220 आवेदक ही निर्धारित समय सीमा के भीतर संकुल केंद्रों पर दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन करवाने पहुंचे। लगभग साढ़े छह सौ से अधिक आवेदक सत्यापन की प्रक्रिया में सम्मिलित ही नहीं हुए, जिसके कारण उनके आवेदन स्वतः ही निरस्त हो गए। आरटीई के तहत आवेदन की प्रक्रिया पिछले माह की 14 तारीख से प्रारंभ हुई थी, जिसकी अंतिम तिथि 28 मार्च और सत्यापन की अंतिम तिथि 31 मार्च निर्धारित की गई थी। सत्यापन न होने के कारण पात्र होने के बावजूद कई बच्चे लॉटरी प्रक्रिया से बाहर हो गए।

15 अप्रैल तक प्रवेश लेना अनिवार्य

राज्य शिक्षा केंद्र ने प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए ऑनलाइन पोर्टल का उपयोग किया है। चयनित विद्यार्थियों के अभिभावकों को उनके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एसएमएस के माध्यम से सूचना प्रेषित की जा रही है। अभिभावक पोर्टल से आवंटन पत्र डाउनलोड कर 3 अप्रैल से 15 अप्रैल के बीच संबंधित विद्यालय में उपस्थित होकर अपनी प्रवेश प्रक्रिया पूर्ण कर सकते हैं। सहायक परियोजना समन्वयक प्रवीण शर्मा ने बताया कि प्रथम चरण के बाद रिक्त रही 679 सीटों को भरने के लिए भोपाल स्तर से द्वितीय चरण की लॉटरी आयोजित की जाएगी, ताकि अधिक से अधिक बच्चों को शिक्षा के इस अधिकार का लाभ मिल सके।

व्यवस्था और जागरूकता पर उठते सवाल

जिले में आवेदन संख्या अधिक होने के बावजूद सीटों का खाली रह जाना कहीं न कहीं अभिभावकों की जागरूकता और विभागीय प्रक्रिया की जटिलताओं की ओर संकेत करता है। कई बार अभिभावक केवल चुनिंदा बड़े स्कूलों को ही प्राथमिकता में रखते हैं, जिससे अन्य स्कूलों की सीटें खाली रह जाती हैं। इसके अतिरिक्त दस्तावेजों की कमी और समय पर सत्यापन केंद्र न पहुंचना भी एक बड़ी बाधा बनकर उभरा है। शिक्षा विभाग अब दूसरे चरण की तैयारी में जुटा है ताकि रिक्त सीटों पर अन्य आवेदकों को अवसर प्रदान किया जा सके।

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