उज्जैन में साइबर ठगी के लिए इस्तेमाल होने वाले ‘म्यूल अकाउंट’ का पर्दाफाश, 71 लाख का संदिग्ध लेनदेन

उज्जैन, अग्निपथ। माधव नगर पुलिस ने ‘ऑपरेशन मैट्रिक्स’ के तहत एक बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने साइबर अपराधियों के लिए काम करने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए ‘म्यूल अकाउंट’ (Mule Account) के संचालक को गिरफ्तार किया है। इस खाते के माध्यम से महज एक वर्ष के भीतर 71 लाख रुपये से अधिक का संदिग्ध लेनदेन किया गया था। पुलिस ने आरोपी को न्यायालय में पेश कर दो दिन की रिमांड पर लिया है।

ऑपरेशन मैट्रिक्स से खुला अवैध लेनदेन का राज

थाना प्रभारी राकेश भारती ने बताया कि एएसपी योगेश तोमर द्वारा की गई विस्तृत जांच के बाद ‘ऑपरेशन मैट्रिक्स’ के तहत प्राप्त इनपुट्स के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज किया था। जांच के दौरान भारतीय स्टेट बैंक की एसएमई (SME) ब्रांच का एक खाता क्रमांक 4252655776 सामने आया, जो ‘महाकाल इवेंट मैनेजमेंट एवं वीडियो फोटोग्राफी’ के नाम से संचालित किया जा रहा था। जब इस खाते के लेनदेन की बारीकी से पड़ताल की गई, तो यह एक म्यूल अकाउंट निकला। पुलिस के निर्देश के बाद तत्काल प्रभाव से इस खाते को फ्रीज कर दिया गया है।

71 लाख का टर्नओवर और ठगी का जाल

पुलिस की वित्तीय जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। रिकॉर्ड के अनुसार, 1 जनवरी 2025 से 31 दिसंबर 2025 के बीच इस एक अकेले खाते में 71 लाख 64 हजार 700 रुपये जमा किए गए। इसमें से 55 लाख 82 हजार 842 रुपये अलग-अलग समय पर निकाले भी गए। बैंक स्टेटमेंट से स्पष्ट हुआ कि खाते में संदिग्ध ट्रांजेक्शन किए जा रहे थे और इसमें केवल सीमित क्रेडिट-डेबिट प्रविष्टियां ही थीं, जो सामान्य व्यापारिक खाते से मेल नहीं खाती थीं।

चेकबुक और एटीएम कार्ड बेचकर रची गई साजिश

पूछताछ में यह बात सामने आई कि मुख्य आरोपी ने अपने बैंक खाते की चेकबुक और एटीएम कार्ड अन्य व्यक्तियों, जिनमें दानू उर्फ अरमान और राहुल कुमार मालवीय शामिल हैं, को सौंप दिए थे। इन व्यक्तियों द्वारा इस खाते का उपयोग ऑनलाइन गेमिंग और साइबर ठगी के माध्यम से प्राप्त अवैध धन को ट्रांसफर करने और निकालने के लिए किया जा रहा था। इस पूरी प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य वास्तविक अपराधियों की पहचान छिपाना और पीड़ितों को आर्थिक हानि पहुंचाना था। इस मामले में पुलिस ने आरोपी छायेश पिता सुरेश सेन, उम्र 35 वर्ष, निवासी महानंदा नगर को गिरफ्तार किया है। आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी की धारा बीएनएस के तहत 318-4 एवं 66-डी आईटी एक्ट के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है।

न्यायालय से मिला दो दिन का रिमांड

पुलिस ने रविवार को आरोपी छायेश सेन को न्यायालय में पेश किया। पुलिस ने तर्क दिया कि मामले में शामिल अन्य फरार आरोपियों की गिरफ्तारी और अवैध धन के नेटवर्क का पता लगाने के लिए आरोपी से पूछताछ जरूरी है। न्यायालय ने दलीलों को स्वीकार करते हुए आरोपी को दो दिन के पुलिस रिमांड पर सौंप दिया है। पुलिस ने एक विशेष टीम का गठन किया है जो मुखबिर तंत्र और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश कर रही है।

क्या होता है म्यूल अकाउंट और कैसे रहें सावधान

म्यूल खाता (Mule Account) एक ऐसा बैंक खाता होता है जिसका उपयोग साइबर अपराधी अवैध रूप से ठगी गई रकम को ट्रांसफर करने या छिपाने के लिए करते हैं। अक्सर अपराधी किसी निर्दोष व्यक्ति को रुपयों का लालच देकर या धोखे से उसका खाता किराए पर लेते हैं या उसके दस्तावेज लेकर खाता खुलवाते हैं। इसका उद्देश्य जांच एजेंसियों को भ्रमित करना होता है ताकि असली अपराधी पकड़ा न जा सके।

पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अज्ञात व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड या चेकबुक इस्तेमाल करने के लिए न दें। कम समय में अधिक लाभ कमाने के लालच में आकर आप अनजाने में किसी बड़े साइबर अपराध का हिस्सा बन सकते हैं और कानूनी मुश्किलों में फंस सकते हैं।

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