उज्जैन अग्निपथ। एलिवेटेड कॉरिडोर इसका हिन्दी में शाब्दिक अर्थ होता है ऊॅँचा मार्ग, ऊपरी मार्ग या इसे फ्लायओवर भी कहा जाता है । उज्जैनवासियों का सौभाग्य है कि माननीय मुख्यमंत्री जी का गृहनगर होने के कारण उज्जैनवासी सन् २०२८ में इन एलिवेटेड कॉरिडोर का मजा ले पायेगे ।
एलिवेटेड रोड सडक़ पर यातायात दबाव को कम करने के लिये बनाये जाते हैं । यह जमीन पर खंभे खड़े करकर ऊपर बनाया जाता है। उज्जैन में इस समय दो एलिवेटेड कॉरिडोर के लिये निविदा का प्रकाशन हो चुका है और इन्हें 15 अप्रैल २०२६ को खोला जायेगा । निविदा का मुख्य बिन्दु यह है कि इसमें कार्य पूर्ण करने की अवधि मात्र १८ माह तय की गयी है ।
पहला एलिवेटेड कॉरिडोर निकास चौराहे से हरिफाटक सेतु (सिक्स लेन) को जोड़ेगा
वर्तमान में निकास से इंदौर रोड की २.८ किलोमीटर की दूरी तय करने में १० से १४ मिनट का समय लगता है । एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण हो जाने के बाद २.८ किलोमीटर की दूरी मात्र ५ मिनट में तय की जा सकेगी । निकास से हरिफाटक पुल को जोडऩे वाला यह मार्ग १७३२ मीटर (१.७ किलोमीटर) लंबा होगा । २ लेन इस कॉरिडोर की चौड़ाई ११ मीटर (लगभग ३६ फुट) रहेगी ।
जमीन पर लगभग 5 फीट व्यास के पिल्लर खड़े किए जाएंगे जो अधिकतम 14 मीटर (लगभग 46 फुट) ऊंचे होंगे । जमीन पर खड़े किए जाने वाले पिल्लरों की दूरी 30 मीटर से 40 मीटर (98 फुट से लेकर 131 फुट) के करीब रहेगी ।
दूसरा एलीवेटर कॉरिडोर : चिमनगंज मंडी से इंदौर रोड
वर्तमान में चिमनगंज मंडी सर्कल से इंदौर रोड सिक्स लेन तक 3.8 किलोमीटर की दूरी तय करने में 10 से लेकर 18 मिनट का समय लगता है इस मार्ग पर एलिवेटेड कॉरिडोर बन जाने के बाद 18 मिनट का समय घटकर मात्र 5 मिनट का रह जाएगा चार लाइन का बनने वाला यहां ऊपरी मार्ग 3536 मीटर (3.5 किलोमीटर लगभग) लंबा रहेगा, इसकी चौड़ाई 19.6 मीटर (लगभग 65 फुट) होगी।
जमीन पर खड़े किए जाने वाले 5 फीट व्यास के पिल्लरों के बीच की दूरी 30 मीटर से लेकर 60 मीटर (98 फुट से लेकर 196 फुट) रहेगी। चिमनगंज मंडी से इस मार्ग पर आने के लिए 592 मीटर लंबा रेम्प बनेगा, 3536 मीटर लंबे इस कॉरिडोर का एक सिरा चामुंडा माता मंदिर चौराहे पर भी निकलेगा जो नए बन रहे ओव्हर ब्रिज को भी जोड़ेगा साथ ही 384 मीटर लंबे रेम्प से रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर जाने वाले यात्रियों को भी इसका लाभ मिलेगा । इन दोनों एलिवेटेड रोड की डिजाइन तैयार करने वाली लायन इंजीनियरिंग कंसलटेंट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने इसका जो प्राकल्लन तैयार किया है । जिसका पारिश्रमिक 10 करोड 40 लाख है । इन ऊंचे मार्गों के सिविल कार्यों पर 409 करोड रुपए खर्च होंगे ।
खत्म हो जायेगा इंदौर गेट तिराहा
एलिवेटेड कॉरिडोर से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाला क्षेत्र इंदौर गेट है जहॉँ पर लोक निर्माण विभाग (सिहंस्थ डिवीजन) के कर्मचारियों ने लाल निशान लगा दिये है । इंदौर गेट तिराहे पर नेशनल बैटरी के संचालक मोहम्मदी भाई की 24 फीट गहरी दुकान में 24 मीटर (लगभग 75 फीट) का निशान यमराज की तरह उन्हें डरा रहा है । मोहम्मदी भाई का कहना है मैं तो 24 फीट लंबी दुकान का ही स्वामी हूं बाकी जमीन क्या मुझे खरीद कर सरकार को देना होगी ।
इंदौर गेट तिराहे से पुराने रेलवे क्रॉसिंग तक बनी सभी नयी होटलें भी एलिवेटेड कॉरिडोर की जद में आ रही है। सिंहस्थ डिविजन (पी.डब्ल्यू.डी.) के अधिकारियों का कहना है कि प्रभावित होने वाली भूमि एवं भवन स्वामियों को सरकार द्वारा लगभग 575 करोड रुपए का मुआवजा दिया जायेगा ।
वर्तमान सडक़ भी होगी प्रभावित
पहले ऐसा माना जा रहा था कि एलिवेटेड कॉरिडोर बनने के कारण वर्तमान मार्ग के रहवासी प्रभावित नहीं होंगे परंतु पी.डब्ल्यू.डी. द्वारा दोनों ही बनने वाली कॉरिडोर मार्गों के नीचे वर्तमान मार्ग के रहवासियों के मकानों पर भी चिन्ह लगा दिये गये हैं। अधिकारियों का कहना है कि कॉरिडोर मार्ग के नीचे आने वाले पिल्लरों के कारण वर्तमान रोडों की चौड़ायी कम हो जायेगी जिससे आवागमन में असुविधा होगी अत: इन मार्गों को भी चौड़ा किया जाना नितांत आवश्यक है इसलिये निकास चौराहे से लेकर इंदौर गेट तक, चिमनगंज मंडी सर्कल से लेकर इंदौर गेट तक के मकानों को चिन्हित करके प्रभावित होने वाले हिस्से में मार्किंग कर दी गयी है।
अब नगर निगम इनको क्लीयर करके देगा उसके बाद 15 अप्रैल को निविदा खुलने के बाद तय होने वाला ठेकेदार निर्माण कार्य चालू करेगा ।
| विवरण | राशि (करोड़ रुपये में) |
| सिविल कार्य | 346.93 |
| जी.एस.टी. (18%) | 62.45 |
| कुल लागत (सिविल कार्य एवं जी.एस.टी. सहित) | 409.38 |
| जनसुविधा कार्य (बिजली पोल, पाइपलाइन एवं अन्य शिफ्टिंग कार्य जी.एस.टी. सहित) | 69.24 |
| 3.608 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण और प्रभावित होने वाले 912 भवनों का मुआवजा | 574.90 |
| सुपरविजन चार्ज (3%) | 10.47 |
| कुल योग (Grand Total) | 1063.93 |
