घटना घाड़ थाना क्षेत्र के सरोली मोड़ तिराहे की है। थाना प्रभारी भंवर लाल मीणा ने बताया कि सभी मृतक व घायल भरतपुर जिले के कामा निवासी हैं। ये लोग कार से शुक्रवार रात उदयपुर घूमने जा रहे थे। इससे पहले रात करीब 12:45 बजे सरोली मोड़ तिराहे पर दर्दनाक हादसा हुआ। बताया जा रहा है कि कार डिवाइडर से टकराकर कई बार पलटी खाई। इस हादसे में कार में बैठे पांच लोगों में से चार की मौके पर ही मौत हो गई।
मरने वाले चारों भरतपुर के
हादसे का शिकार हेमंत अग्रवाल पुत्र राजेंद्र अग्रवाल, दिवाकर शर्मा पुत्र पवन शर्मा, अरिहंत जैन पुत्र कुमकुम उर्फ राजू जैन और कृष्णा पुत्र बाबूलाल सैनी हैं। गुलशन पुत्र हरभजन राजपूत घायल हो गया है। सभी भरतपुर के हैं और 20 से 22 वर्ष की उम्र के हैं। घायल गुलशन को टोंक अस्पताल ने जयपुर के लिए रेफर कर दिया है।

एक दोस्त का अस्पताल में चल रहा इलाज
कार में सवार चारों दोस्त अरिहंत, गुलशन, दिवाकर और हेमंत उज्जैन जा रहे थे, जिनमें से तीन की मौके पर मौत हो गई। पांचवां ड्राइवर कृष्णा की भी मौत हाे गई है। एक दोस्त गुलशन गंभीर है, जिसका इलाज जयपुर में ट्रॉमा अस्पताल में चल रहा है।

उज्जैन जा रहे थे, उदयपुर रुककर बर्थडे सेलिब्रेशन का था प्लान
चारों दोस्त भरतपुर से उज्जैन घूमने के लिए निकले थे। घर से शुक्रवार शाम करीब साढ़े चार बजे निकले थे। उदयपुर में भी स्टे का प्लान था। कल अरिहंत का जन्म दिन था। प्लानिंग के अनुसार अरिहंत का जन्मदिन उदयपुर में सेलिब्रेट करना था। वहां से उज्जैन के लिए रवाना होना था।

माता-पिता का इकलौता बेटा था अरिहंत
हादसे में मरने वालों में हेमंत की बर्तन की दुकान थी। दिवाकर जिम का संचालन करता था। गुलशन पढ़ाई करता था। अरिहंत की पत्थर की टाल थी और वह अपने अपने माता-पिता का अकेला लड़का था। हादसे के बाद व्यापार महासंघ के आह्वान पर कामां तहसील के बाजारों को बंद रखने का फैसला किया है।

रात को ही दोस्त का फोन आया तो हुई पहचान
चौकी प्रभारी हरफूल ने बताया कि हादसे के बाद जब पुलिस मौके पर थी, उसी समय एक मृतक के मोबाइल पर उसके दोस्त दीपक का फोन आया। उस कॉल को पुलिस ने रिसीव किया। पुलिस ने पूछताछ की तो इनके बारे में जानकारी प्राप्त हुई।
रात साढ़े 10 बजे पिता ने फोन पर कहा था- टोंक में ही रुक जाना, बेटा बोला- कोटा में रुकेंगे
हादसे के बाद अस्पताल पहुंचे मृतक अरिहंत के पिता राजू जैन ने बताया कि रात करीब साढ़े 10 बजे बेटे से फोन पर बात हुई थी। उसी समय मैंने कहा था कि रात में ज्यादा लंबा सफर मत करो, टोंक में ही स्टे कर लेना, लेकिन बेटे ने कहा कि वे कोटा जाकर ही रुकेंगे। टोंक पहुंचने पर यह हादसा हो गया। कार अरिहंत ही चला रहा था।