महाकाल मंदिर कभी नये प्रयोगों के लिये अखबार की सुर्खियों में आता है तो कभी कर्मचारियों की लापरवाही के चलते यहां पर विवाद की स्थिति निर्मित होती है तो कभी श्रद्धालुओं को दर्शन कराने के नाम पर रुपये ऐंठने को लेकर सुर्खियों में छाया रहता है। अभी संभागायुक्त ने महाकाल मंदिर में कर्मचारियों के लिये अपील समिति का गठन किया है। जिसमें यहां कार्यरत कर्मचारी अपनी समस्याओं और जो कर्मचारी किसी कारण से निलंबित किये गये हैं उनकी सुनवाई के लिये अपील समिति का गठन किया है। लेकिन इस समिति पर भी भेदभाव का आरोप लगना शुरू हो गया है। भेदभाव के आरोप इसलिये लग रहे हैं कि यहां पर जो कर्मचारी भारी अनियमितता के चलते निलंबित हुआ था उसे बहाल कर दिया गया। जबकि उस मामले की निष्पक्ष जांच तक नहीं की गयी। बताया तो यह भी जा रहा है कि जिस निलंबित कर्मचारी को बहाल किया गया है व सत्ताधारी नेत्री का रिश्तेदार है और उक्त नेत्री के द्वारा उसे महाकाल में पदस्थ करवाया गया था। समझ में यह नहीं आता है कि विश्व प्रसिद्ध महाकाल मंदिर में सत्ताधारी नेताओं का दखल कब बंद होगा। क्योंकि सत्ताधारियों के कारण यहां पर निलंबित कर्मचारियों को शह मिलती है और वह पुन: उसी कार्य को दोहराते हैं जिसके कारण उन्हें निलंबित किया जाता है।
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