महाकाल मंदिर कभी नये प्रयोगों के लिये अखबार की सुर्खियों में आता है तो कभी कर्मचारियों की लापरवाही के चलते यहां पर विवाद की स्थिति निर्मित होती है तो कभी श्रद्धालुओं को दर्शन कराने के नाम पर रुपये ऐंठने को लेकर सुर्खियों में छाया रहता है। अभी संभागायुक्त ने महाकाल मंदिर में कर्मचारियों के लिये अपील समिति का गठन किया है। जिसमें यहां कार्यरत कर्मचारी अपनी समस्याओं और जो कर्मचारी किसी कारण से निलंबित किये गये हैं उनकी सुनवाई के लिये अपील समिति का गठन किया है। लेकिन इस समिति पर भी भेदभाव का आरोप लगना शुरू हो गया है। भेदभाव के आरोप इसलिये लग रहे हैं कि यहां पर जो कर्मचारी भारी अनियमितता के चलते निलंबित हुआ था उसे बहाल कर दिया गया। जबकि उस मामले की निष्पक्ष जांच तक नहीं की गयी। बताया तो यह भी जा रहा है कि जिस निलंबित कर्मचारी को बहाल किया गया है व सत्ताधारी नेत्री का रिश्तेदार है और उक्त नेत्री के द्वारा उसे महाकाल में पदस्थ करवाया गया था। समझ में यह नहीं आता है कि विश्व प्रसिद्ध महाकाल मंदिर में सत्ताधारी नेताओं का दखल कब बंद होगा। क्योंकि सत्ताधारियों के कारण यहां पर निलंबित कर्मचारियों को शह मिलती है और वह पुन: उसी कार्य को दोहराते हैं जिसके कारण उन्हें निलंबित किया जाता है।
Next Post
तीन दिवसीय अभा कालिदास समारोह का समापन: अगले साल से बढ़ेगी पुरस्कार की राशि मंत्री ने की घोषणा
Fri Nov 27 , 2020
उज्जैन। महाकवि कालिदास के बारे में जितना बोला जाये, उतना कम है। कालिदास के साहित्य में 64 कलाएं विद्यमान थीं। महाकवि कालिदास ने अपनी रचनाओं में अनेक विषयों को वर्णित किया है। उनके साहित्य में भूगोल, विज्ञान, खगोल, इतिहास और श्रृंगार का बोध भी था। महाकवि कालिदास की कल्पना अदभुत […]

यह भी पढ़ें
-
6 years ago
कांग्रेस की तैयारियां शुरू..!
-
5 years ago
खबरों के उस पार: गंगा दशहरा पर शिप्रा मैली..!
-
6 years ago
और भी अतिक्रमण हैं सिंहस्थ भूमि पर..!
-
6 years ago
खबरों के उस पार: प्रशासन पास..!
